तन को जल से धुलाना सरल है मगर
तन को जल से धुलाना सरल है मगर
मन को निर्मल बनाना बड़ी बात है
तन को जल से धुलाना सरल है मगर
मन को निर्मल बनाना बड़ी बात है
मन को निर्मल बनाना बड़ी बात है
कोशिश कोई लाखो भले ही करे
इंतु सत्गुरु बिना बात बनती नहीं
नंत पड़ ज्यान पालेना आसान है
अपना याननद पाना बड़ी बात है
तन को जल
से धुलाना सरल है मगर मन को निर्मल बनाना बड़ी बात है
पंथ में वेश में देश
परदेश में
पंथ में वेश में देश परदेश में चित
रहता फसा राग और देश में
किसी का जलाना कठिन ही है क्या
यान दीपक जलाना बड़ी बात है
तन को जल से धुलाना सरल है मगर मन को निर्मल बनाना बड़ी बात है
बन के विद्वान विद्या के अभिमान में
अपन मत तो चलाना यसंभव नहीं
है तो पर देश परदेश में चित रहता है क्या यान दीपक जलाना बड़ी बात है
तन को जल से धुलाना सरल है मगर मन को निर्मल बनाना बड़ी बात है
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