ĐĂNG NHẬP BẰNG MÃ QR Sử dụng ứng dụng NCT để quét mã QR Hướng dẫn quét mã
HOẶC Đăng nhập bằng mật khẩu
Vui lòng chọn “Xác nhận” trên ứng dụng NCT của bạn để hoàn thành việc đăng nhập
  • 1. Mở ứng dụng NCT
  • 2. Đăng nhập tài khoản NCT
  • 3. Chọn biểu tượng mã QR ở phía trên góc phải
  • 4. Tiến hành quét mã QR
Tiếp tục đăng nhập bằng mã QR
*Bạn đang ở web phiên bản desktop. Quay lại phiên bản dành cho mobilex
Tự động chuyển bài
Vui lòng đăng nhập trước khi thêm vào playlist!
Thêm bài hát vào playlist thành công

Thêm bài hát này vào danh sách Playlist

Bài hát hanuman katha bhag 1 do ca sĩ Prem Prakash Dubey thuộc thể loại The Loai Khac. Tìm loi bai hat hanuman katha bhag 1 - Prem Prakash Dubey ngay trên Nhaccuatui. Nghe bài hát Hanuman Katha Bhag 1 chất lượng cao 320 kbps lossless miễn phí.
Ca khúc Hanuman Katha Bhag 1 do ca sĩ Prem Prakash Dubey thể hiện, thuộc thể loại Thể Loại Khác. Các bạn có thể nghe, download (tải nhạc) bài hát hanuman katha bhag 1 mp3, playlist/album, MV/Video hanuman katha bhag 1 miễn phí tại NhacCuaTui.com.

Lời bài hát: Hanuman Katha Bhag 1

Lời đăng bởi: 86_15635588878_1671185229650

भक्त जनु जैसियाराम आये पवन पुत्र अंजनी नंदन राम जी के दुलारे हनुवान जी के कथा सुनिये
जै जै जै श्री राम की जै बोलो हनुवान की
जै जै जै श्री राम की जै बोलो हनुवान की
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुना
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
अंजनी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
जै जै जै श्री राम की जै बोलो हनुमान की
कमलापति ले रहे धरा पर त्रेता में अवतार सुनो
पापों से बोझ हिल बसुधा का प्रभुजी हरेंगे भार सुनो
सोच रहा हूं मैं भी उनका सेवक बनके जानो
इश्ट देव की सेवा करके जीवन धन्य बनाओ
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
अन्जनी सुत की कथा महान सुनो सब का होगा कल्यान
भक्त जनों अपनी भक्त आस्था और कर्म से
श्री हनुमान जी सभी देवी देवताओं के प्रिय है
भगवान शंकर भगवती पारवती के साथ कैलाश में विराजमान थी
उनकी भूरी रंग की जटाओं में गंगा बिहार कर रही थी
मस्तक के एक कोनी पर चंद्रमा शोभित हो रहा था
गले में शर्फों की माला भुजाओं में रुद्राग शललाट पर रक्त चंदन काटी का
भोलेनात की शोभा को अद्वतीय बनाए हुए थे
सामने नंदी बैठा था और कुछ दूर पर उनके अनुचर खेल रहे थे
एका एक राम राम कहते हुए उन्होंने समाधी भंग की
पार्वती की ओर विचित्र भाव से देखने लगे
पार्वती जी ने कहा क्या बात है प्रभू
मेरी ओर ऐसे क्यों देख रहे हो
क्या मुझे से कुछ अपराध हो गया
या और कोई विशेश बात है
भोले नात ने कहा नहीं देवी तुम से कोई अपराध नहीं हुआ
पार्वती जी ने कहा फिर क्या बात है बताईये न
भोले नात कहने लगे
देवी सारे देवता उनकी सेवा में धरती पर जा रहे है
मैं इस अवसर से वंचित नहीं रहना चाहता
नर रूप में नारायन इच्छवाक वंश में जन्म लेंगे
श्री राम चंद्रोन का नाम होगा उनके दर्शन के लिए मुझे जाना पड़ेगा
यह सुनकर पार्वती जी दुखी हो गई
कई जनम तप किया प्रभू तो मिला तुम्हारा साथ
ये कैसा सैयोग आ गया बिछड रहे हो नात
बिना तुम्हारे मैं ये जीवन कैसे जी पाऊंगी
शिव बियोग को हे नागेश्वर कैसे सह पाऊंगी
केशरि नंदन पवन पुत्र की

केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिटाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिटाते हैं
अंजनी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा किल्यान
प्रेमी जनों भोले नाथ ने देखा कि पार्वती कुछ चिंतित हो गई है
पूछने लगे क्या बात हो गई देवी
अभी तो तुम प्रसन्न चित थी और अब अचानक तुम चिंता ग्रस्त हो गई
मैं समझ गया तुम्हें मेरा वियोग सता रहा है
बड़े प्यार से भोले नाथ ने कहा
पार्वती जी मैं तुम्हें छोड़ कर नहीं जाओंगा
अरे मैं तो अपना अंश भेजूंगा
उसी के द्वारा मैं प्रभु श्री राम के लिलाओं का दर्शन करूँगा
और तुम्हें भी कराऊंगा
मैं सदैव तुम्हारे ही पास रहूंगा
इतना सुनते ही पार्वती जी भोले नाथ के चरणों में नतमस्तक हो गई
चेहरे पर प्रसंता की मुस्कान विखर गई
भोले नाथ ने उन्हें बाहों से उठा कर सीने से लगा लिया
इसी समय भोले नाथ का आसन डगमगा उठा
भोले नाथ ने सोचा क्या बात है आसन क्यों हिलने लगा
ध्यान लगा के देखा तो हिमाले की घाटियों में
असुर भस्मासुर भोले नाथ का तप पूर्ण कर चुका था
और भोले के प्रगट होने की प्रतिक्षा कर रहा था
उसका तप देखकर भोले नाथ प्रसन हुए
और उसके सामने प्रकट होकर बोले
भोले बोले भसमासुर से तू है भक्त महान
तेरे तप से अति प्रसन हूँ क्या दू मैं वरदान
भसमासुर चालाक असुर था बोला भोले नाथ
भसम करू मैं जिसके सर पे रख दू अपना हाथ
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका करें
कष्ट मिठाते हैं राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते
अंजनी सुत की कथा महान सुनू सबका होगा कल्यान
प्रेमी जनू भसमासुर की बात सुनकर
भगवान भोली नाथ ने उसे एव मस्तु कह दिया
यानि भसमासुर को वह बरदान दे दिया कि वह जिसके सर पर हाथ रखेगा वह भसम हो जाएगा
प्रेमी जनू भोले नाथ तो सचमुच भोले ही हैं जिसने उन्हें आर्थ होकर पुकारा उन्होंने शीघ्र ही उसकी
समस्याओं का समाधान किया वह अवधरदानी है दोनों हाथों से उड़ेलते हैं वह करुणा के सागर है इतना बड़ा दानी और दयालू कोई दूसरा नहीं है वह आशुतोष है निर्विकार और मोह रहित है
प्रेमी जनों सारे देवी देवताओं को तो महंगी महंगी भेट चढ़ाई जाती है उन्हें क्या देते हैं आप उन्हें एक लोटा जल बेलपत्र धतूरे के फल यही सब तो आप चढ़ाते हैं इतने पर भी भोले बावा प्रसन हो जाते हैं हरदें से पुकारिये वह अ�
अवश्य सुनते हैं आशु तोष तुम अवधरदानी आरति हरहु देन जनु जानी भक्त जनु शरण में आए हुए प्राणी का भोले बावा गुण और दोष नहीं देखते उसके पाप शाप अपराध सब शमा कर देते हैं वह केवल उसे अपना भक्त जानते हैं ऐसे ही
भस्मासुर को भी उन्होंने अपना भक्त समझा उसके मन में क्या चाला की है इस पर भोले नाथ ने ध्यान नहीं दिया और इधर भस्मासुर ने क्या किया वह दुष्ट पापी खुद कहता है
भोले नाथ तुम्हारे सिर पे रख तूं पहले हाथ यदि तुम जल के भस्म हो गए तब ये बर है साच
संकट में अब प्राण पड़ गए सोचे भोले नाथ दुष्ट असुर रख देगा अब तो मेरे सिर पर हाथ
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते अंजनी सुत की कथा महान
सुनो सबका होगा कल्यान
भक्त जनू भगवान भोले नाथ तो भागने लगे प्रभू बचाओ प्रभू मेरी रख्षा करो
भक्तों लेला देखिए भगवानों के साथ भी कैसी कैसी विपत्तियां आती हैं जहां उनकी भी बुद्धिक काम नहीं आती हैं
यही तो हुआ था मायापति भगवान श्री राम के साथ ये जानते हुए भी कि सोने का अमरिग नहीं होता फिर भी संयोग वश्व उसके पीछे पीछे भाग लिये और यहां सीता जी का हरन हो गया
प्रेमी जनों विपत्ति के दिनों में अच्छे अच्छे ज्ञानी भी विवेग हीन हो जाते हैं कोई उपाय काम नहीं आता अब भोले नाथ को ही देख लिजिये भोले नाथ आगे आगे और भस्मासुर पीछे पीछे
नदी नाले बन परवत डांकते हुए भोले नाथ हाफने लगे अवसर पा करके वह एक ज्ञाडी में छुप गए
भस्मासुर चारों और उन्हें ढूनने लगा इधर भगवान विश्णु ने भोले नाथ की पुकार सुनी
कमलापति ने सुना शम्भु की दुख से भरी पुकार
शेख्रमोहिनी रूप बना के आप हुचे करतार
जहम जहम करती त्रिपुर सुन्दरी आई नारी नवेली
छुप छुप के तरुवर के पीछे करती थी
के शरिनंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सब का कष्ट मिठाते अंजनी सुत की कथा महान
सुनो सब का होगा कल्यान
प्रेमी जनू नियति का खेल देखिए
भस्मासुर भूल गया
कि मैं शिवजी के पीछे भाग रहा था
और वह त्रिपूर सुन्दरी के आगे पीछे घूमने लगा
प्रेमी जनू मायावी राक्षस तामसी प्रवृत्ति
वासना से परिपूर्ण भस्मासुर भोले नात को भूल गया
उसके प्राण मोहिनी के मोह में पड़ गये
उसकी नियत तो पहले ही खराब थी
उसने सोचा था यदि भोले नात भस्म हो जाएंगे तो वो
पार्वती को उठा ले जाएगा
कामी पुरुष कभी इश्वर की कृपा का लाब नहीं उठा पाता
अब देखिए भगवान विश्णु की लीला
मोहिनी कभी इस पेड़ के पीछे तो कभी उस पेड़ के पीछे
घंटों लुका छिपी का खेल खेलती रही
और मोहित भस्मासुर पागल होकर
मोहिनी के पीछे पीछे भागता रहा
अंततह मोहिनी भस्मासुर के सामने आई
भस्मासुर मोह ग्रस्त था
ऐसा रूप लावन्य और यवन उसने कभी नहीं देखा था
भस्मासुर बोला
नारि नवेली आज अकेली
बन में कहां से आई
सही न जाए मुझे से तेरे यवन की अंगडाई
मोहित हूँ मैं रूप पे तेरे
मुझे से ब्याह रचालो
तुझे बनाऊंगा पट रानी
मुझे से शपत करालो
केशरि नन्दन पवण पुत्र की
केशरि नन्दन पवण पुत्र की
महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा
सबका कष्ट मिठाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा
सबका कष्ट मिठाते हैं
अंजनी सुत की कथा महान
सुनो सब का होगा कल्यान
भक्त जनू वह बोला
सुन्दरी मैं असुरों का राजा भस्मासुर हूँ
सर्वस्रेष्ठ बलवान हूँ मैं
भस्मासुर की बात सुनकर मोहिनी
मुस्करा कर बोली
मैं तुमसे विवाह करने के लिए तैयार हूँ
परन्तु तुम्हें मेरे साथ पहले नृत्य करना होगा
भस्मासुर प्रसन्न हो गया
बोला तुम्हारी शर्त मुझे मनजूर है
चलो मैं तुम्हारे साथ नृत्य करता हूँ
मोहिनी ने कहा तो फिर एक हाथ कमर पर और एक हाथ सिर पर रख के नाचू
जैसे मैं नाचती हूँ
कामी पुरुष वासना में बुद्ध विवेक खो देता है
प्रेमी जनू भस्मासुर के साथ भी वही हुआ
अब मोहिनी रूप में भगवान विश्णु ने भोलेनाथ को पुकारा
भोलेनाथ जहाडी से बाहर निकलो
देखो तुम्हारा महाकाल राख का धेर हो गया है
भोलेनाथ बाहर आये और राख का धेर देखकर खुशी से उसी में लोट गए
परन्तु मोहिनी के रूप में उन्हें पार्वती जी नजर आई
और उनका अंश बाहर निकल पड़ा
धर के अपना रूप विश्णु जी शिव के आगे आए
पवन देव को शेगर वहीं पर कमलापति बुलवाए
शिव का अंश करो अस्थापित सही जगह ले जाके
किसी दुष्ट के हाथ लगेना रखना इसे छुपाके
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते
हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
अंजनी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
अंजनी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
भक्त जनू भगवान विश्णों ने कहा
भक्त जनू भगवान विश्णों ने कहा
पवन देव यह महादेव का अंश है इसको हनुमान बनना है भक्तों का दुख दूर करना है
पवन देव शिव का अंश एक बांस की पुंगी में लेकर उड़ चले
अब पवन देव उड़े जा रहे हैं और चारों ओर अपनी दृष्टि दवडाते जा रहे हैं
कि कहीं कोई उचित अस्थान और उचित पात्र मिले जहां शिव का अंश फलित हो सके
एक निर्जन अस्थान पर नदी के किनारे पतिब्रता अंजना आखें मूंद कर
आराधना में लीन थीं पवन देव को लगा यही नारी उचित पात्र है
और अस्थान भी उचित है बस फिर क्या था तुरंत आकाश से उतरे
और धीरे से अंजना के कान में शिव भोले का अंश डाल के फूंक दिये
पवन देव ने इसी क्रिया के लिए
साथ अंजना को आशीरवाद दिया
हे देवी इस शिव अंश से तुम्हें परम प्रतापी
महा भीर कीर्तिमान यशश्वी और ईश्वर भक्त पुत्र की प्राप्ति हो
यह कहके पवन देव उडचले पवन देव हनुमान जन्म के प्रथम करता है भक्तों
इसे लिए हनुमान जी को पवन पुत्र कहा जाता है
अब हम आपको अंजना के बारे में बताते हैं
पुन्जिकस्थला इंद्रलोक की एक अपसरा प्यारी
रिशियों का अपमान किया तो शाप मिल गया भारी
वाली
आनर्योनी मिले तुझकों पर रूप बदल सकती है
जा सुमेर गिरि गोतम के घर रिशियों की बस्ती है
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिटाते
अंजनी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
प्रेमी जनू पुंजिक अस्थला केसरी राज की राणी बन गई
प्रेमी जनू इंद्र के दर्बार में अफसराओं का निवास है
ये अफसराएं नृत्य गान तो करती ही हैं
अपने सौंदर्य से रिशियों का दप भी भंग करती है
एक बात हम बता दे आपको इन्हे यववन क्रीडा का पात्र मत समझिये
ये दैवी शक्तियों से भरपूर रहती हैं क्योंकि देव लोक की रहने वाली होती हैं
ये शापित होकर यदि मृत्य लोक में आती हैं तो भी इन्हे अच्छा कुल ही मिलता है
अब देखिये पुंजिक अस्थला ने रिशियों से बंदरों जैसी ऊट पटांग हरकत की
रिशिगन नाराज हुए और बानर योन में जाने का शाप दे दिया
जब पुंजिक अस्थला ने रिशियों से क्षमा मांगी तो उसे इच्छा अनुसार हूप बदलने का वरधान मिल गया
और साथ ही वेर पुत्र भी प्राप्त करने का वर मिला
वह गोतम रिशी के घर जनमी केसरी राज से ब्याह हुआ
और हनुमान जैसे राम भक्त महाबीर पुत्र को जन्म दिया
विधि का विधान विचित्र है ईश्वरी माया को कोई नहीं जानता
सब कुछ पहले से ही बना बनाया होता है
शिव का अंश तो अंजनी के गर्भ में पहुँच गया
अब आप एक दूसरी घटना भी सुनिये
पुत्र प्राप्ति का यज्य अवध में दशरच ने करवाया
अनुष्ठान का फल प्रसाद सब राणी में बटवाया
नारि सुमित्रा के दोने पर चील जपटा मारा
दोना ले कर उड़ी गगन में फल प्रसाद वो सारा
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सब का कश्ट मिठाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सब का कश्ट मिठाते हैं
अन्जनी सुत की कथा महान सुनो सब का होगा कल्यान
भक्त जनों सुमित्रा बोली क्या मुझे से भगवान रूठ गए हैं
प्रेमी जनों किसी भी अच्छे कार्य में हमेशा कोई न कोई विग्न अवश्य आता है
अब यहां देखिए रानिया अपना प्रसाद लेकर आंगन में खड़ी
आपस में बाते कर रही थी कि अचानक कहीं से एक चील उड़ती हुई आई
और रानी सुमित्रा का दोना लेकर आकाश में उड़ गई
सभी रानिया हका बक्का रह गई
सुमित्रा जी उदास हो गई और कहने लगी
मेरे भाग्य में पुत्र सुख नहीं लिखा है
कोशल्या और कैकेई ने उन्हें धीरज बंधाया और कहा
उदाश मत हो बहन पुत्र सुख लिखा क्यों नहीं है
ये लो हम दोनों के प्रसाद से आधा आधा
आप इसे ग्रहन करो सब ठीक होगा इश्वर नाराज नहीं है
कोशल्या और कैकेई ने अपने दोनों से प्रसाद निकाला
और राणी सुमित्रा को दे दिया
इसलिए सुमित्रा के दो संतानी हुई
लक्षमण और शत्रुगन
कोशल्या के राम और कैकेई के भरत हुए
अब आगे देखिये भक्तों उस दोने का चील ने क्या किया
सती अंजना करे बंदना रवि के नदी किनारे
सूर्य देव से विनय कर रही आचल रही पसारे
दोना गिरा वही आचल में देखो प्रभु की माया
सूर्य देव को नमन किया उसने प्रसाद को खाया
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा
सब का कश्च मिठाते हैं
अन्जनी सुत की कथा महान सुनो सब का होगा कल्यान
भगत जनों इश्वर की लिला से
वह नारी बिलकुल अन्जनी सुत की कथा महान
जान थी प्रेमी जनों विधाता क्या संयोग बैठाता है यह देखिए श्रीराम चंद्र जी सोर्यवंशी है और
अंजना सोर्यदेव की आराधना कर रही थी उसी समय चेल ने यज्ञ का प्रसाद अंजना के आंचल में डाला इस
दृष्टिकोण से अगर आप देखें तो हनुमान जी राम के भाई हुए और इस बात को संकेतों में स्वयं श्रीराम जी
ने भी स्वीकार किया है रघुपति की नहीं बहुत बढ़ाई तुम मम प्रिय भरत ही समभाई भगवान की लीला भक्तों भगवान ही
जानते हैं हरी अनन्त हरी कथा अनन्ता अब आगे की कथा सुनिए शिव के अंश पवन के वर से महाबीर बलवान सती
अंजना से जन में है राम दूत हनुमान
सूर्य देव से स्वर्णिम काया नैन मिले हैं
लाख
करुणारा जिकित सरी ने दी गिर नेहरदें विशाल
केशरि नन्दन पवन पुत्र की
हो केशरि नन्दन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते हैं
अन्जनी सुत की कथा महान सुनू सब का होगा कल्यान
भगत जनों केशरी राजा ने सुरण मुद्राएं लुटाई
खूब वस्त्र दान दिये अपार खुशियों से छा गया पूरा केशरी राज का महल
भगत जनों महर्ष वाल्वि की अपनी रामाण में लिखते हैं
सूर्यदत्त वरस्वर्ण सुमेर उर्णाम पर्वत यत्र राज्यन प्रशास्त्यस्क केशरी नाम वैपिता
तस्यभार्याव भूवेष्ठा अन्जनेति परिश्रता
जन्यामास्तस्यामवैवायुरात्मजमुत्तमं भगत जनों इस श्लोक का अर्थ यह है कि भगवान सूर्य के बरदान से
जिसका सुरूप स्वरण में हो गया है ऐसा एक सुमेर पर्वत है जहां हनुमान के पिता केशरी राज करते हैं
उनकी प्री पतनी अन्जनी के गर्व से पवन देव के वर द्वारा एक उत्तम पुत्र पैदा हुआ
राजा केशरी दयालू थे उनके हृदय में करुणा थी वह प्रजा के दुख सुख का ध्यान रखते थे सुमेर उगिर विशाल और सुरणिम था
अन्जनी पतिब्रता नारी थी ऐसे विभूतियों के बीच यदि कोई बालक जन्म लेता है तो इन लोगों के सारे गुण उसमें स्वतह आ जाएंगे
हनुमान जी के जन्म से हर्षित होकर राजा केसरी ने अन, धन, सोना, चांदी, हीरा, मोती, मुंगा और लाल मड़ियां प्रजा के बीच लुटाने लगे
बड़े बड़े रिशी, मुनी, तपस्वी और ब्राम्भण इस उत्सों में आए महाराज केसरी ने सबका आदर सत्कार किया और हृदयं खोल कर दान दक्षणा दिया
भाट और भाटिनों ने सोहर गाया, चरणों में विर्दावली सुनाई, ब्राम्भणों और महर्षियों ने आशिर्वाद दिया
आकाश से देवों ने फूल बरसाए, कैलाश पर बैठे भोले वाबा, यह सारा दृश्य देखकर हरशित हो रहे थे
प्रेमी जनों, हनुमान जी चैत्र मास की पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष मंगलवार के दिन पैदा हुई
श्री राम जी चैत्र मास की नवमी को पैदा हुए, सेवक का धर्म है, स्वामी के पीछे चलना, इसे लिए छह दिन बाद हनुमान जी आए
तो भक्तों, अब हनुमान जी का जन्म हो चुका है, तो आईए मंगल घीत और सोहर सुनते हैं
जुग जुग जिये तेरा लाल, रहे खुश हाल, गोध तेरी मुस्खाए
जुग जुग जिये तेरा लाल, रहे खुश हाल
मैया अंजनी खुला तेरा भाग्य अमर हो सुहाग
फूले फले तेरी गोदलाल के प्रमोद नित्य तू दुलराए
लल्ला सोजा आई रात ये सुहानी रात लोरी गाए
धन्य धन्य के सरी राज हुआ जनम सफल अब तेरा
चारों और जैकारे गुझे द्वारे रिशि मुन्यों का डेरा
माईव सुधा हुई निहाल वीर हाल
हनुमान आज तेरे धाम आए
सारे देवी देव संघ अवनिष दे रहे
आशीस राम के काम आए
जुग जुग जिये तेरा लाल रहे
खुश हाल गोद तेरी मुस्काए
भक्त जनों इस प्रकार केसरी राज के महल में आनन्द ही आनन्द की वर्षा हो रही थी
प्रेमी जनों अब भोलिनात के ग्यारहमे रुद्र रूप में पवन पुत्र धर्ती पर आ गए है और उधर श्री अजुध्या जी में महाराज दशरत के महल में
महारानी कोशिलिया के गर्भ से श्री राम आ गए है तो राम धुन होनी चाहिए
राम राम कहुबा रंबारा भोसागर में राम किनारा
श्री राम जे राम जे जे राम
सुत्वित नारी भवन परिवारा
हो ही जाही जग बार ही बारा
ओ मा एक आखंड रघुराई नरगती भगती कृपाले देखाई
बड़े भाग मनुष्य तन पावा सुर दुर लभ सब ग्रंथ है गावा
अंजनी सुत्वित के कथा महान सुनो सब का होगा कल्यान
भगत जनु साधन धाम मोक्ष कर द्वारा पाइन जहीं पर लूक समारा
मानो शरीर कई जन्मों के तप से मिलता है
यह तन देवताओं के लिए भी दुरलभ है
यह तन साधना का धाम है मोक्ष का द्वार है
तन होगा तभी भक्ती होगी
बिना शरीर के ईश्वर की भक्ति कैसे करेंगे
इसलिए इस तन का सही उपयोग करके अपना पर लूक समार लूक
नरतन पाई विशय मन देही
पलट सुधाते सथ विश लेही
मानव तन पाकर विश्यों में लिप्त होना
अमृत छोड़कर विश पीने के समान है
आकरचारी लक्ष चोड़ी
रासी
जोनी भ्रमत यह जीव अविनाशी
राम सिया राम सिया राम जै जै राम
प्रेमी जनों राम जी का भजन करने से
मनुश्य चोरासी लाखी
योनियों में भ्रमण करता रहता है
जो नहीं कराई राम गुनगाना
जीह सुदादुर जीह समाना
राम कथा सुन्दर करतारी
संसय बिहग उड़ा वनहारी
राम सिया राम सिया राम जै जै राम
प्रेमी जनों चलिए अब राम धुन के बाद
पवन पुत्र अंजनी लाल की बाल लिला का
दर्शन किया जाए
मा के साथ कैसी कैसी चुहल बाजी करते हैं
यह देखिए
प्रेमी जनों समय के साथ
अंजनी कुमार भी धीरे धीरे बड़े होने लगे
मा अंजनी ने उनका लालन पालन बड़े प्यार से किया
शरीर पर उबटन लगाना
तेल मालिश करना
आँखों में काजल
माते के दोनों कोनों पर काजल का टीका लगा देना
ताकि अंजनी कुमार कु किसी की नजर ना लगे
घुंगराले बालों में चोटी बांधना
बाजुओं में बाजु बंद सोने में रत्न जटित
कलाई में कंगन
गले में हार पाव में पैज़नी
माता अंजनी बड़े प्यार से अपने लाल का सिंगार करती थी
अंजनी लाल की कंचन काया
पर जब सूरज की किरने पढ़ती थी
तो वह सोने की तरह ज्योतिर मैं हो जाती थी
प्रह्मी जनू अंजनी लाल बहुत सुन्दर
उनकी सुन्दर्ता में उनका सिंगार अदभुत शोभा बढ़ा देता था
कभी आंगन में कभी द्वार पर अंजनी कुमार खेलते थे
भागत लाल घुटुरुवन बल अंगना
बिहसी बिहसी लूटत मां का मन
भागत लाल घुटुरुवन बल अंगना
ठुमकी ठुमकी चले हीले कर धनिया
छमक छमक बाजत पर जनिया
अटपट लटपट बिहरत नटखट
गिरत उठत बिहरत

धूसर हो तेपट भागत लाल घुटु रुवन बल अंगना
धूल धूसरीत लट हो जाए मैया प्यार से गोद उठाए
चूमे चूमे मुख अंजनी मैया लेत छुपा आँचल की चहिया
बाल लाल की लेला पर मन मोहित है आनंदित जीवन
भागत लाल घुटु रुवन बल अंगना
प्रेमी जनों कितना सुन्दर द्रिश्य है
मनोहारी द्रिश्य है
पवन पुत्र के बालेपन के लेला से मन प्रफुलित हो जाता है
मन के उपर मधुमास छा जाता है
हरिदैं भाव बिभोर हो जाता है
भक्त लेला
पवन पुत्र के बालेपन के लेला से मन प्रफुलित हो जाता है
भक्त लेला से मन प्रफुलित हो जाता है
मैया अंजनी ये द्रिश्य देखकर मन ही मन आनंदित हो रही है
और दोड़ दोड़ कर अपने लाल को गोद में उठा कर चूमने लगती है
फिर आंचल से उनकी धूल जाड़ के उन्हें आंचल में छुपा लेती है
बच्पन का यह द्रिश्य देखकर किसका मन आनंदित नहीं होगा
भक्त जनों बच्पन एक ऐसी चीज है जो एक बार आके चला जाता है
तो दुबारा लोट के नहीं आता
उसकी यादें जब आती हैं तो हरदाई में एक टीस भर जाती है
साधारण मानो जीवन में भी देखिए छोटा बच्चा सबको प्यारा लगता है
उसकी तोतली बोली पर मान निसार हो जाती है
बच्पन जाति पाति धर्म मजहब से हट के होता है
बच्चा किसी का भी हो उसे सब प्यार करते हैं बच्पन होता ही ऐसा है
हनुमान जी की कथा श्रवन करने का जो पुन्य मिलता है उससे कई गुना उनकी बाल लीला सुनने का पुन्य मिलता है
बच्पन से नट खट थे मारुती करते बहुत धमाल उचल कूद तरुवर पे चड़के जूले पकड़के डाल
रिशियों के आश्रम में जाके करते धूम धमाल ध्यान भंग हो जाते रिशि के खूब बजाते गाल
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिटाते हैं
अन्जणी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
भक्त जनूं रिशि लोगों को जो दान दक्षणा अनाज पानी अनुदान में मिला रहता था
उसे ये बिखरा देता था
रिशी लोग परिशान हो जाते थे, मा अंजनी से शिकायत करते थे, माता रिशीयों से ख्षमा मांगती और हनुमान जी को खूब डाट लगाती थी, इनसे दोबारा ऐसा न करने के लिए कान पकड़वाती थी,
जब इनका उदास चेहरा देखती थी तो ममता उमण पड़ती और इन्हें उठाकर छाती से लगा लेती थी मैया, प्रेमी जनों, पिता राज केसरी इन्हें कंधे पर बिठाके घुमाया करते थे,
भगते जनों, श्री हनुवान जी चंचल चुल बोले और नटखट तो थे ही, प्रति दिन उगते हुए लाल-लाल सूरज को देखकर सोचा करते थे कि कोई बहुत बढ़िया स्वादिष्ट मीठा फल है, इसे तोड़ के खाना चाहिए,
एक दिन रात को ये मा की गोद में सो रहे थे, मा के आँखों से आँसू निकले और इनके बदन पर चू पड़े, श्री हनुवान जी चौंक कर जाग गए, देखा तो मा की आँखों में आँसू झिल मिला रहे थे, और चेहरे पर घनगोर उदासी, इन्होंने मा से कारण प
ना किया, किन्टु जब ये हट पर उतर आए, तो माने बताया, शाप गरस्त नारी हूं, लला रिशियों का है शाप, प्राण छूट जाएगा मेरा आते शीघ्र प्रभात,
सूरज अंबर पर आते ही छोड़ूंगी संसार, मेरे बाद कहां भटकोगे, जाओगे किस द्वार,
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते,
राम, दूत, हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिठाते,
राम, दूत, हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिठाते,
अंजनी सुत की कथा महान, सुनो सबका होगा कल्यान,
भगते जनों मातानि कहा,
पुत्र अभी तुम अबोध हो हो नादान हो पर यह चिंता दिन रात मुझे सताती है
यह बात सुनकर केशरी नंदन ने कहा मा तुम चिंता मत करू काल की क्या बिसात वो तुम्हे छूब ही नहीं सकता
यह सूरज सुबह निकलने ही नहीं पाएगा
और केशरी नंदन ने छलांग मारी मा की गोद में बैठे बैठे
मा की गोदी से आकाश की ओर उड़ने लगे
सूर्य देव ने देखा तो प्रफुलित हो गए
उन्होंने जान लिया कि शिव जी के ग्यारह में रुद्र आ रहे हैं
उन्होंने अपनी किरने शीतल कर दिया
इधर पवन देव घबराई
पवन पुत्र सूर्य की किरनों से जल न जाए
इसलिए शीतलता प्रदान करते हुए वह भी साथ साथ चलने लगे
उड़ते उड़ते अंजनी लाल सूर्य देव के रथ पर जा पहुँचे
और सूर्य को निगलने का प्रयास करने लगी
उस दिन थी घनगोर अमावस ग्रहन योग दिन करका
राह सूर्य की ओर चला देखा वानर का लड़का
रथ पर बैठा खेल रहा है कहा कौन ये आया
सूर्य ग्रहन अधिकार है मेरा किसने इसे दिलाया
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिठाते
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिठाते
अन्जनी सुत की कथा महान सुनू सबका होगा कल्यान
राहु ने कहा यह अधिकार सुर्य ग्रहन का वर्दान तो देवराज ने मुझे dart sägaCollek
भगत जनों पवन पुत्र ने राहु को भी कोई फल समझ लिया और उसकी तरफ दौड़ पड़े
राहु घबरा के भागा और चिलाने लगा देवराज मुझे बचाओ देवराज मुझे बचाओ
इंद्र के दर्बार में पहुँचकर उसने वानर बालक का हाल बता दिया और कहने लगा देवराज सूर्य ग्रहन का अधिकार तो आपने मुझे को दिया था
फिर ये कौन है जो मेरे अधिकार पर आक्रमण कर रहा है कहीं आपने मेरे साथ कोई छल तो नहीं किया
देवताओं का क्या भरूसा मेरी किसी भूल पर आप नाराज हो गए हूँ
देवताओं के चित्त का भरूसा नहीं खणे कश्टा खणे तुष्टा रुष्टा तुष्टा खणे खणे
देवराज इंद्र ने डाट कर कहा चुप रहो मैंने कोई छल कपट नहीं किया
चलो मेरे साथ चल के देखते हैं सचाई क्या है सब सामने आ जाएगी
चले इंद्र ऐरावत चड़के राह चल रहा पीछे पवन पुत्र ने समझा फल है रथ से उतरे नीचे
लंबा चोड़ा श्वेत रंग का
अच्छा फल ये आया पवन पुत्र जपटे हाथी पर देवराज घभराया
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिटाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा
सबका कष्ट मिटाते अंजनी सुत की कथा महान
सुनो सबका होगा कल्यान
भक्त जनू देवराज इंदर ने अपने बज्र से पवन पुत्र पर प्रहार कर दिया
वज्र पवन पुत्र के हनू में लगी
प्रेमी जनू पवन पुत्र चूट खाकर पीडा से कराहते हुए आकाश से नीचे धर्ती की ओर गिरने लगे
पवन देव ने शेकर ही उन्हें अपने हाथों में सम्हाल लिया
और परवत की एक गुफा में लाकर लिटा दिया
पवन देव को इंद्र की इस हरकत पर बड़ा क्रोध आया
और पुत्र का मोह उन्हें विचलित कर गया
उन्होंने तीनों लोकों में वायु के प्रवाह को रोक दिया
वायु ही जीवन है प्रेमी जनू
सब की सांसें घुटने लगी
सब का दम घुटने लगा
सारे देवतां ब्रह्मा जी के पास भागे
ब्रह्मा जी सब को लेकर परवत की गुपा में आये
पवन देव को दुखी देख कर धीरज बंधाया
पवन देव ने ब्रह्मा जी को शाष्टांग प्रडाम किया
ब्रह्मा जी ने उन्हें उठा के उनके सिर पर हाथ फेरा
और कोवन पुत्र की हनु पर हाथ फेरा
प्रेवी जनों ब्रह्मा जी के हाथ का स्पर्श पाते ही
श्री हनुमान जी की मूर्चा छूट गई
वह चैतन्य होकर बैठ गए
सब लोगों में प्रसन्न ताछ आ गई
और ब्रह्मा जी ने कहा
सुनो देव गण इस बालक से सब का होगा काम
ये बालक सहयोगी होगा जब आएंगे राम
सभी देव अपना अपना दो बालक को बरदान
महा शक्ति से पूरित कर दो हो जाए बलवान
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कश्ट मिठाते हैं
अन्जनी सुतकी कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
अन्जनी सुतकी कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
फिर क्या हुआ भक्त जनो सुनिए आनंद ही आनंद
आनंद
इंद्र ने कहा, यह मेरे वज्र की चोट सहन कर चुका है, इसलिए इसका शरीर वज्र के समान होगा, और बजरंग बली कहलाएगा, चोट इसके हनुपर लगी है, इसलिए इसका नाम हनुमान होगा,
ब्रह्मा जी ने कहा, इसे मेरे ब्रह्मास्त्र का डर नहीं होगा, यह महावीर होगा, सोर्य देव ने कहा, मेरी कांति और तेज का सौवा भाग मैं इसे देता हूँ, और मैं इसे विद्या अध्यायन कराऊँगा,
पिंगल वर्ण एक आँख वाली कुबेर ने कहा इसे युद्ध में विशाद नहीं होगा
और मेरी गदा संग्राम में सदैव इसका बध नहीं कर सकेगी
यमराज ने कहा मेरे दंड से ये अबध्य और निरोग रहेगा
वर्ण ने कहा दस लाख वर्षों की आयू हो जाने पर भी
मेरे पाश और जल से इसके मृत्यू नहीं होगी
भोलेनात ने कहा ये मेरे शस्त्रों द्वारा अबध्य होगा
विश्वकरमा जी ने कहा
मेरे द्वारा बनाए गए सारे अस्त्रों से ये अवध्य ही रहेगा
और चिरन्जीवी होगा
अन्त में ब्रह्मा जी ने कहा
ये देरघायू और महात्मा होगा
दुरजन का नाशक और सज्जनों के लिए अभय वर देने वाला होगा
सारे देवता वरदान देकर चले गए
पवन पुत्र महा भलवान हो गए
रिशियों के आश्रम में पुनह उद्धंडता करने लगे
किसी रिशी की गोद बैठके दाड़ी नोच रहे है
उनका कुशा कमंडल तोड़े फिर कुछ सोच रहे है
भाड सुमर्णी माला तोड़े डाली पर लटकाए
महा बली बजरंग बली तन बल अब नहीं समाए
केशरि नंदन पवन पुत्र की
केशरि नंदन पवन पुत्र की महिमा तुम्हे सुनाते है
राम दूत हनुमान हमें
हमेशा सबका कष्ट मिठाते है
राम दूत हनुमान हमेशा सबका कष्ट मिठाते
अंजनी सुत की कथा महान सुनो सबका होगा कल्यान
भक्त जनू रिशी लोग इनकी उद्दंडता से तंग आ गए
क्रोध में आकर रिशियों ने
इन्हे शाप दे दिया
पवन पुत्र जिस बल का सहारा लेकर
तुम हम लोगों को सथा रहे हो
जाओ उस बल का तुम्हे ज्ञान ही नहीं रह जाएगा
रिशियों के शाप की खबर सारे नगर में फैल गई
केसरी राज और सती अंजना दुखी हो गए
रिशियों का शाप जूठा नहीं होगा
अब हनुमान को बल की याद कैसे आएगी
कोई उपाय सोचा जाए
भक्त जनों
हनुमान जी की इस दिव्य कथा को
हम यहाँ पर वेराम दे रहे हैं
हनुमान जी की कथा का यह भाग एक हमने आपको सुनाया
अब इसके बाद श्री हनुमान जी की कथा का भाग दो ले करके हम आएंगे
तब तक के लिए आप लोग हमारे साथ राम नाम का संखिर्तन करिए
श्री राम जे राम जे जे राम
श्री राम जे राम जे जे राम
बोलिये बजरंग वली की
जैसी आराम आप सबका कल्यान हो

Đang tải...
Đang tải...
Đang tải...
Đang tải...