अय जालिम किम तुने प्यार में मुझों ऐसा सिला दिया
कि तेरी बिवफाई के खनझर मुझे इतना रूला दिया
मजल जाता है,
फिसल जाता है,
वो आवारा है,
बदल जाता है।
मजल जाता है,
फिसल जाता है,
वो
आवारा है,
बदल जाता है।
बेवफागेर की बाहा में दिख जाता है,
दिख जाता है।
उसका फ्यार बढ़ा संस्ता है, बिक जाता है।
उसकी याद में आसो नहीं बहाईंगे।
जो उससे फ्यार में दोफे
तमाम पाए हैं,
उन्हें निकाल बाहर हम अभी जलाएंगे।
सजा देता है,
मजा लेता है,
ये भव्रा है,
दगा देता है।
वो तो हर फूल की कलियों पे टिक जाता है। तिक जाता है।
उसका फ्यार बढ़ा संस्ता है, बिक जाता है।
वो पहले दिल लगी करके दीदार करता है। खुली निगाहों में सबने
हजार भरता है।
वो दीबाना है,
बर सयाना है। उसकी फितरत ही भूल जाना है।
जहां पे हुस्सन की दौलत दिखे लुट जाता है। लुट जाता है।
उसका फ्यार बढ़ा संस्ता है, बिक जाता है।
उसका फ्यार बढ़ा संस्ता है, बिक जाता है।