बह रही गंगा की धारा
आ रहा संसार है,
है पावन संगम की धरती,
ये प्रयाग राज है
है पावन संगम की धरती, ये प्रयाग राज है
है
पावन संगम की धरती, ये प्रयाग राज है
रिस्कुल गोरो लाए भगीरत ऐसा जड़ में धाम कहा,
ये है गंगा का निर्मल जल धुलत सब के पाप यहां,
रिस्कुल गोरो लाए भगीरत ऐसा जड़ में धाम कहा,
ये है गंगा का निर्मल जल धुलत सब के पाप यहां,
यहां सनातन का यहां देरा हो गया संग्राम है,
ये पावन संगम की धरती,
ये प्रयाक बाराया मान काosure में हो गया....
चरण पखारे राम का केवट जपते हैं सिरीराम यहां
महादेव भी यहां बिराजे हो अमरित असनान यहां
बक्तर की करविण के challenging whole year
एप्रयाग राज है