हैं खफा
हैं खफा
तुमसे मिरा दिल अब भी है पता
तुमको ये चाहे तब भी हर दफा
तुमसे ये कहने चाहे तू बता
हो ना पाए जो भी मेरे शिकायते है तुझसे
तेरी मुस्काने देती है मिटा
कैसा ये जादू तुने नारा है मुझे पे
खुद के
दिल पे रहाना मेरा काबू है
मेरे ये बस में ना रहा
बिखलता जा रहा
उलजी क्यूं है शामे मेरी तुझ में ही
उज़ा ना पाऊं क्यूं खो गई मैं अब यूझी
क्यूं विशारे तू समझे ना तीरी हर खामिया लगती सही
मन मेरा क्यूं
ना है मानता खोया है ऐसे क्यूं ये तुझ में ही
जो वो भी
मेरी शिकायते हर दत से तेरी मुस्काने देती है मिटा
कैसा ये जादू तू ने ना ला है मुझे पे
खुद के लिए दिल पे रहा ना मेरा काबू है
मेरे ये बस मेरा नहा पेखलता जा रहा
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