तु चादसे
खुब सुरत भी थोड़ी दूर सी
रातों में तू ही
रोशनी लगे
तेरे बिना दिल
अधूरा सा लगे
मैं हर पल तुझे
तकता हूँ
चाद के पीछे छुपते अर्मान जैसे
तेरी खामोशी भी कुछ कहती है
तेरा साथ सब कुछ कह जाता
तू हो तो सारी दुनिया रोशन है
तु ना हो तो अंधेरा रह जाता है
तु चाद सी
नाज़ुक भी रोशन भी मैं सितारा साथ
तेरे पास चमकता हूँ तु चाद सी
दूर भी
अपनी भी हर रात
तु
मेरे खाबों में उतरता है
कभी चूनु तुझे तो दर लगता है
कहीं खाबों जैसे बिखर न जाये
पर तु पास आये तो लगता है जैसे जिन्दगी में रोशनी चाये
तेरा नूर मेरे छहरे पे है
मेरी हर बात में तेरा जिक्कर है
तु जो कहें तो मैं खुद से जुदा हो जाओं
तु चांद सी खुब सूरत भी थोड़ी दूर सी
मैं रात सा तेरे नूर में जीता हूँ
तु चांद सी और मैं तेरा
आशिक सा