अपने लोके सिम्हल सी मधूर मिक्कला मुझी के प्रस्त्मुभी
इसनिगे पहिना गूले लेगे लोग पहिना दीदी सनिकाल आनगे
किता के तुकुर तुकुर सब हमरे दी सानगे
सोला बरस के भिलाऊं जही आण साँ
सब निहारे
गौर साँ
सोला बरस के भिलाऊं जही आण साँ
सब निहारे
गौर साँ कहुना करा के इ गुप्त सब अंगल के तैयो चाक है
गौर साँ
मुह गुमा का,
मुह गुमा का कहे सुना का की है तो तरसा का
इ दंगडानी तो हरे मृगीनानी चोडू चार चोड़ने गे
किता के तुकुर तुकुर सब हमरे दी सानगे
कतवो संहारी अपन हिरदे के
तैयो मनने
थीर रहे
आजनु काभी चम है आपन ता
आचर उड़े के
खैस परे
चोकी समहारी
उठा के सारी देखे हुलकी मारी
की है मारे मन ही मन जारे पढ़ा के देखे धान गे
किता के तुकुर तुकुर सब हमरे दी सानगे
वैसल को ना करहू हम सदीखन अपना आगन
घार में
वैसल को ना करहू हम सदीखन अपना आगन
घार में
बेटी जो चीत बुलब नहीं कोना
हम कतो नई
घार में
एहने ताता
तुहीं कहता आओर कतो चे अंत ये बेटाना कड़ै चे किया हैना
पड़ाक देखन हानगे किता के तुकुर तुकुर सब हमरे दी सानगे