के पवल तने संकच हरन महावीर हनुमान।
कृपा
दास पर कीजियो
देयो अभे वरदा।
गोपालपुर में बसत हैं
स्री
गोविन्द महाराज।
ठाकुर जी की यती कृपा
चला था जग में राज।
भगवान की बड़ी ही कृपा थी
महाराज गोविन्द जी पर,
जो गोपालपुर में रहते हैं,
और बड़े ही धर्मात्मा, नीत्मान, गुड़्वान
राजा हैं,
ये जग जी कलंचली है, आप तक
पहुँचा रहे हैं।
कि सीलवाल गुड़वाल न्रपति
नीती से
राज चलाते थे,
हारे प्रजा सुखी
सर्वक्तर रहे पसुपच्ची मोजयः उडाते थे।
महराज गोबिंद जी,
भगवान कनहिया की असीम अनुकुम्पा से यह साराज चलाते हैं,
आप तो छोड़ो,
पसुपच्ची जीवजन्तू भी मोज मस्ती में रहते हैं।
के धर्ती महिया अलकूल नहीं,
कोई कमी नहीं।
ती ग्रपा प्रवल सिरी क्रिष्ण धन धान से जन्ता सुखी रही।
महराज
के राज में ना कोई घाटा है,
और ना महराज के सासन पर किसी राजा का कोई करज है।
एक बेटा विक्रम है यो लखो,
राजनीलली सुपमारी थी।
दोनों ही अती संशकारी थे,
महलल की
सुवान्यारी थी।
महराज गोविंद राज के सासन में
कोई कस्ट नहीं है,
धन धान से संपन्य है महराज,
और महराज के एक बेटा है जिसका नाम है विक्रम,
और एक बेटी है जिसका नाम है राजनीलली।
दोनों ही विद्या से परपूर हैं,
सिष्टाचार और संशकार से भरे हुए हैं दोनों,
पुत्र और पुत्री।
महराज भी बड़े प्रसन्म होते हैं कि भगवान ने उलाद भी दी,
तो जैसे हम हैं, वैसा ही हमारा बंश चलाया है।
एक दिल की बात हुआ ये
आरे एक दिवस की बात सुनो तुम सज्जन चितलाई
आरे पिक्रम भो सवार यस्व बे बनकों रोजाई
एक दिल
महराज का बेटा विक्रम गोडा सजा करके
बन में बनविहार करने के लिए जा रहा है
एक दिवस की बात सुनो तुम सज्जन चितलाई
आरे विक्रम भो सवार यस्व बे बनकों रोजाई
तबही
तबही भूपती आए जाते हैं तबही पाबल आए जाते हैं
आरे राज कुमर विक्रम से राजा यों बतलाते हैं
लड़का पांचो हतियार कसके
निकलने इबाला था तब तक पेताजी आते हैं
बेटा कहता है पेताजी को प्रणाम पेताजी
कहते है या इसमान हो कहा जा रहे हो
पेताजी जंगल में आखेट करने के लिए जा रहा हूँ
बोले आज मत जाओ क्यों
आज जंगल को मत जाओ
एक बहुत जरूरी काम ध्यान से लाला सुन लईयो
क्या
मित्र मेरे महंद्र पृताप भाई
जब लगर में रहें मुशीबत उनके सिर्याई
हे लाला
मेरे एक मित्र है जिनने तुम अच्छी तरह जानते हो महंद्र पृताप
बोले हाँ हाँ
तो उनके राजमेर उनके बहुत बड़ी मुशीबत है
और
कह रहे थे कि आपके घर से कोई मदद कर सकता है
तो हमसे मुलाकात कर ले
तो तुम एक काम करो आज सिकार खेलना केंसिल कर दो और उदर चले जा
तो लड़का बोला पेताजी अगर आपकी आग्या है
तो सुरोधार है
जा रहा हूं
तो महराज ने एक बात नई कही कि लाला कि
राजा बोले कुमर से सुनो लगा कर ध्यान
आरे संग राजनी को भी लो
तोरत करो प्रस्थान
अगर आज आज नहीं जाओगे वो कहा एक बेहन को भी साथ ले जाओगे
बेहन का जाना ज़रूरी है वो अनिवार है
आखिर कर तुम्हारी बेहन बुद्धमान है उसे साथ ले के जाओगे
सुरोधार बंदुओ
गोडा पे रागनी
चड़ी गई
चलने को तयार हुए
हाँ
गोडा पे रागनी चड़ी गई और चलवे को तयार हुए
दोनों बेहन और भाई विक्रम और रागनी आज पृतापनगर में जा रहे हैं
पिताजी की आग्या है दोनों बेहन वाही बतलाते जा रहे हैं
पृतापनगर में आई गए हैं
एक यत्व तुत्रस्थे निहारा है
आरे विक्रम ने तब बेहना से बोलो बचल नुचारा है
गोडा रोख लिया
पृतापनगर में गुजे तो भाईया का चेहरा सुस्त देखा
तो रागनी पूछने लगी कोई प्रॉबलम कोई परिशानी बहुत बड़ी दिक्कत है
क्या तुमने कुछ यहां आ करके कुछ नोटिस किया
मेरी समझ में तो कुछ आ नहीं रहा है तो सुनो
थोड़ी दूर और चलो एक चीज देखती चलो क्या
कि कैसा ये राची बेहन मेरी
और सब बूडे यहां दिखाते हैं
कि
कोई विशेश या पड़ा
कि इश
राजा पर
भरे जवान नजर नहीं आते हैं
आप राक नहीं बोली कहते हो शुष है कि इरक कोई नियाव लडका नजर नहीं आते थे
इसलिए य nghाव को थोड़ा مै करते हैं
बड़े मुशीवत में हैं दोनों बेनभाई।
तबी सामने से देखा कि गुझर गा रहे हैं।
के बूडे ने धीरे कही सुन बेटा सुकमार,
यहां क्यों मरने आये हो।
राजकुमार ने गोड़ा की राज खिची,
गोड़ा रोक लिया।
पर एक बात कही, बाबा,
देखो हमारी द्वाई कोई लड़ाई ना है,
लेकिन तुम हमसे यह कह रहे हो,
कि तुम यहां मरने क्यों आये हो,
तो थोड़ा सा हमारा मारग दर्संग करिये,
आखिरकार आपने यह कहा क्यों।
तो वो बुझरग आत्मी रो गया,
पर बोलो,
कि मैं उम्र में तुमसे चोटा हूँ,
पर मैं तुम्हें जो दीख रहा हूँ,
वो बुझरग अवस्था में दीख रहा हूँ।
यह कोई रोग है यहाँ, नहीं रोग है।
कोई बुढा व्यक्ति रोगे बोला,
अरे दीरे दीरे,
बुढे ले विक्करम को घिरा सुनाई है।
अरे दीरे दीरे, बुढे ले
विक्करम को घिरा सुनाई है।
क्या?
अरे उसके आने से पहले तुम बेटा जाओ बिलाई है।
विक्करम बोला तुम उससे भी चोटे हो। बोले हाँ।
और सुनो,
अगर तुम विक्करम मेरी तरह नहीं होना चाते हो,
तो उसके आने से पहले यहाँ से चले जाओ।
उसके आने से पहले उसके आने से पहले उसका नाम नहीं है।
अरे यहाँ आता एक राचचस उसने भारी करी तवाई है।
यूपर नजर परेबाई बूडो भेत बनाई है।
सुल बूडे के बचन की विक्करम अपनी अकल घुमाई है।
अरे राजभवल की सीद लगाई चल दे बेहन भाई है।
दरते दरते दोनों बेहन भाई राजभवल पहुँचे हैं।
और जैसे ही राजभवल पहुँचे हैं अश्वनी।
अरे राजा डरे से बेठे हैं और दोनों गहे बाई है।
और बेहन भाई नहीं जुक करके दीनों सीज नवाई है।
महराज डरे हुए बेठे हैं।
दोनों बेहन भाई ने प्रणाम किया। और एक बात कहीं,
पहचान लिया।
कोले पहचान लिया आप मेरे मिद्र के बच्चे हैं।
कोले महराज ये सब क्या वीमारी हैं?
आप तो बहुत प्रतापी राजा थे।
आपकी तो बेटी भी बहुत
सिद्धी प्राप्त कन्या हैं। और आपकी बेटी
के होते हुए आपके राच में ये परिशान है।
कि
राजा महंध्र प्रताप ने कही कुमर से बात आरे बोआ वे बाते
पहले
रम जाओ मेरे ताप।
आये तो हो पर गलत समय पे आये। थोड़ी देर वाद वो राच्चस आने वाला है।
मैंने ये उम्बीद नहीं की थी कि तुम भी
उसी समय पर आओगे जिस पर वो राच्चस आता है।
तो देन दोनों बेहनवाई बहुत डर गए।
तो विक्रम ने कहा महाराज वो कौन है जिससे पूरा राज ब्रत हो गिया है।
आप जिससे डरे हैं आखिरकार वो है कौन। बेटा वो बहुत बड़ा राच्चस है।
और महाराज ने जब ये
सुना के वो कौन है
तो महेंदर प्रताप रो करके बोले हैं भीया।
हारे सुनके रोई गए
बुफ़ पे सुजाने
हारे बेटा बड़ी मुसीपत भावे।
सुनके रोई गए
बुफ़ पे सुजाने
हारे बेटा
बड़ी मुसीपत भावे।
यहाँ पर एक राच्चस आता है।
हारे सबको बुढ हो
कर जाता है।
यहाँ पर एक राच्चस आता है। उसकी नजर में ही सकती है।
खीबा से
सब हैं परेसानी बेटा
बड़ी मुसीपत भावे।
दुखी बात है,
बड़े कश्ट की बात है।
कैसी?
हारे मेरी बसुन्दरा
है सुक्मारी।
ओहो ले गओ
राच्चस
बाई पल गहूरी।
तब से
हम जादा हैं हैरानी।
बेटा
बड़ी मुसीपत भावे।
जो मेरी पुत्री है, जो तमारी पेहन है बसुन्दरा,
उसको भी जबरन उठा ले गया है।
वो बसुन्दरा तो सिद्धी है। सिद्ध कन्या है।
उसको प्रश्चान नहीं जाता नहीं। उसे अपनी सिद्धी
तक का मौका नहीं दिया। उसने
हरड कर ले गया। राम राम राम।
जाने कैसे रहती होगी।
जाने कैसे
रहती होगी।
जाने कैसे रहती होगी।
ऐसा ही नहीं।
जागो सेतान।
लाला पड़ी मुसीवत भारी।
कहने लगे हैं महराज
कि मेरी कन्या तक को ले गया।
पूरे राज को भूड़ा कर गया।
पताने मेरी बेटी किस हाल में हो गई।
एक बाप जब गिड़गडा रहा है तो विक्रम और
रागनी की आँखों से भी आँशू बहने लगे।
जो उसकी नजर पर चड़ जाता है उसे भूड़ा कर देता है।
विक्रम यो कहने लगे।
सुनो
तात चितलाई।
धभडा।
रो और नहीं। तुम्हारी आँखों में आँशू अच्छे नहीं लगता है।
तुम बहुत बहादर राजा हो। मेरे पिताजी
आपके कौसल की बहुत प्रशंशा करते हैं।
आप रोही नहीं। आप चंता नहीं करिए। मुझे पर भरोषा करिए।
मैं आपकी बेटी को, अपनी बेहन को जरूर लाओगा।
बस एक काम करो।
आरे क्यों रहे तुम घवडाई।
सुनो चितलाई कई समझाई।
कहां करे
निवास। बोला चसि मोई रा रग दियो पताई।
आरे रस्ता दियो
बताई। राचा रस्ता दियो बताई।
कहां करे निवास। बोला चसि मोई रा रग दियो बताई।
आरे पोलो
राजकुमार।
ना करू अबार। अवैरो जाई।
एह महराज
जाने बदलो यपनो भेश।
लगाले नाईं देर लगाई।
भेश बदल लिया विक्रम ने।
मनो तांत्रिक को मरे हजारी।
बोले महराज
चलिया से चल करके ही जीज़ सकते हैं।
बूड़े बन गए विक्रम।
जो उस द्रश्टी से देखाईगा ही नहीं कि मैं बूड़ा हो जाओ।
बनो तांत्रिक को मरे हजारी।
लागली से
गिराय। चारी।
बेहन
को समझाया कि इस राज पर संकत है।
मैं भेज बदल के जा रहा हूँ।
उस राच्चस के पास बेहन बसुन्दरा को चुड़ा के लाओंगा।
मेरा भीया हुआ ये
पल के बच्चिरा चल दो लाईं
करिया मारी
बर्वत के
यूपर बैठो रे
प्राच्चस बलत होरी
दूर से विक्रम लिया रहे हैं
पिजडा में
लोई का बहुत बड़ा पिजडा है उसमें बसुंदरा केद है
दूर से परिशान कर रहा है बेहन बसुंदरा को
विक्रम ने एक चाल और चली
बगएर चल के बसुंदरा को चुड़ा नहीं पाऊंगा
बसुंदरा से एक ही बात कहता है वो निसाचर
साधी कल ले
तू जब तक मुझे बढ़ेगी नहीं
तब तक इस पिजडा से निकलेगी नहीं
और तेरे बाप के राज को कटंब कर दूँगा
निकले
महराज को मरने अरे चली गजब की चल
अरे बात हमारी
सुनो मित्र त्यारी साधी होगी ततकाल
भईया विक्रम ऐसें कहे मित्र मेरी बानी सुन लेयो
अग तो विक्रम ऐसें कहे मित्र मेरी बानी सुन लेयो
विक्रम उस राच्चस से बोला है भाईया वोले
हा तुम मुझे एकांत में पांच मिनट दे दो
तुम इस लड़की पे ऐसा जादू करतुंगा कि ये सिर्फ तुम से ही साधी करेंगे
राच्चस बोला बड़ो बूड़ो है तांत्रिक है और भाईया वरादरी की बात
बोले ला
विक्रम कहने लगा है
कि हे देवी
मैं कोई गेर नहीं मैं विक्रम हूँ
और तुम्हारे पिताजी के मित्र का लड़का हूँ
मैं रागनी का भाई हूँ आप
एक काम करियेगा कि आप तो सक्तियों की धनी है फिर आपके साथ ये सब कैसे है
बोले इसने मुझे मौका ही नहीं दिया सक्ति जागरत करने का
बोले इसको मरने का कोई उपाए है तुम्हारे पास
सरुता बंदू ओ के बल सुन्दरा कहने लगी भईयो
के तुम सुनियो अरे जी हमारी है
हे भाईया इसको ये तनिक भी महसूस नहीं होना चाहिए
कि तुम मेरे राज की मुशीवत काटने आए हो
नहीं ये तुमें मार देगा
ये बहुत बहुत फल्वान है
और ये कैसे मरेगा तो मैं तुम्हारी साहिटा ज़रूद करूँगा
मैं पिजडा में केद वहसकू। लिकिन मुझे
मालुम है इस दुश्ट का बंद कैसे होगा
मुझे जल्दी बताओ, जल्दी बताओ, समय नहीं है।
सुनो
बशनरा बोली ओ भईया
के मेरी सुलियों बाती हमारी है
मेरे बाग के युत्तर
हारे दिसी जईयो
कदम को भारी है।
बाग के उत्तर दिसा में
एक कदम का पेड़ है,
जब उसकी जड़ को तुम खोदोगे,
तुमे एक पुस्तक मिलेगे,
और जब तुम उस पुस्तक को पढ़ोगे,
तुमे मालुं पढ़ जाएगा कि ऐसे राच्चो सौसे कैसे
जीता जाता है। बस इतना तुमें मदद कर सकती हूँ,
आगे कुछ नहीं। हुआ ये?
के विक्रम ले गोला,
हरे गोला,
आरे कदम
व्रचड़ दिनायो है।
विक्रम ने
वही किया जो बसुंद्रा ने बताया,
पर सुरोता बंदगो,
सुनहरी पुस्तक निकली है सोने की।
उसे पढ़ता रहा, पढ़ता रहा, पढ़ता रहा,
इस पुस्तक में लिखा है
कि राच्चसों को मारने के लिए
सुरण पानी की आवश्चकता होती है,
अगर किसी राच्चस पर पढ़ जाए तो वो मर जाता है।
और उस पुस्तक में लिखा है
कि सुरण सरोवर किदर है।
आज विक्रम उस पुस्तक के माध्यम से आगे के लिए चला है।
आरे गोड़ा चड़ी के विक्रम चल गओ।
आरे कोई सरोवर के दिन आई।
आरे
पुस्तक खोली है रे बेटाने।
आरे पुस्तक रही है मार्ग बताई।
आरे मद्यकुल जाके है अंदर।
आरे श्वर्ण जल आज दे लईयो। और राच्छस छीता दईयो।
लगाई। आरे पुस्तक बोली हो रे बेटा।
आरे मोकु पड़ी ओ धिखान लगाई।
आरे लिज सरीर पे एक वुछीटा।
आरे बेटा भूल से लईयो न लगाई।
आरे बातमान लईयो रे पुस्तक खिती। औरे तो गोडा में के गोडा लगाई।
आज सुरण जल यणि सुनेरी किताब बता रही है कि सुनेरा जल ले करके
राच्चस पे मार देना
काम हो जाएगा।
आज विक्रम धीरे धीरे धीरे धीरे उस जल को ले
के चला है और वहीं जहं राजकुमारी कैब है।
आरे ले के चली दो नीर।
आरे पास राच्चस के आयो है।
आरे पास
राच्चस के आयो है।
अरे राच्चसने जव जल दे भूतो गुरूद करीद आयो है।
वो राच्चस बोला हो रे जलीया दुष्ट।
तुन तो कह रहा था कि साभी करा हूँगा।
तुने तो मेरी मौत का जाल बंदिया रे।
कहने लगा रे दुष्ट। तुझस्ट साधी की कोशिस कर रहा
है। वो एक पवित्र राजपमारी है। वो मेरी महल है।
आरे दुष्ट चल मेरे संग की ओ।
केमेने समझो अपनो मित्र भवकी रो मेरो यवजीयो।
राजपमारी कहती है भईया विक्रम,
जनकट तुम्हारे हाथ में ये पुस्तक है।
इसका कोई जादो,
इसकी कोई नजर तुम्हें परेशान नहीं कर सकती है।
दुष्ट चल को इस पर मार दो।
आज राजकुमार विक्रम बोलो।
आरे कुमर ने कही कड़क बाली,
अरी वनाई रो जाए अपनी राणी।
अरे दुष्ट यव नहीं बचपावेगो रे के पागल।
अरे जैसो भी ओ बोज पीर तुम फट नहीं खाबेगो।
कहने लगा एए,
दूर खड़ा रहना,
ये जल और ये पुस्तक लेकिन मेरी पास मत आना।
राजकुमारी कहती है विक्रम भीया देर मत करना।
ये माया भी है, ये कुछ भी कर सकता है,
देर मत करना।
अरे तब विक्रम लेनी रह उठायो।
लाचच अपनी जगे गवडायो।
अरे क्रोध करके जब भी विक्रम ले आगे पढ़के दैये है ललिकार।
भाग नहीं पाएगा, खड़ा रहा।
आज दोस्तों,
उस राच्चस के ऊपर जैसे ही जल मारो।
जल मारते ही हुआ तो ये,
कि राच्चस इमरि स्वर्ग सिदारो है इत,
ये विक्रम ले लाच्चस मारो है।
आज विक्रम ने राजकुमारी को भी पढ़जा से मुक्त किया,
तो घोड़ा पर बिठा करके महराज के पास ले के आया,
और सुरोता ओ,
हुआ तो ये। जितने बूड़े थे, वो सब जवान होगे।
विक्रम की लख़िवीरता खुसे गए महराज।
हारे राज तिलक करो
पुत्र को
दयोत खति और ताज।
महराज का कोई बेटा नहीं था,
इसलिए उन्होंने
विक्रम को ही राजा बना दिया।
के धल्ने धल्ने करने लगा
वहाँ का सभी समदाई,
पाठक जी की लेखनी
भारत रहेंगा।
सुनेरी किताव की
चोटी सी कहानी मैंने आप तक पहुंचाई है,
अगर कोई गलती हो रही हैं तो चमा करें।
परत भुमी है बीरों की
और हम
उनकी कता सुनाते हैं।
परत भुमी है
बीरों की और
हम उनकी कता सुनाते हैं।
जैसी पुस्तकों में बढ़ते हैं,
गा करकी तुम्हें बताते हैं।
सासाथ
अंकित बेटा डोलक पर संगती कर रहे हैं
और
भूरे भाईया
जो नगला जहील की रोड मैनपुरी के हैं
चिम्था पर संगती दे रहे हैं।
आरे भारत नाम हमारो है
जनता के हम सेवक हैं
हनुमान कृपा बस चहाते हैं
के तुम ही तो हमारी रोनक हैं
बुले हन्वान जी महराज की बुले सियावर राम चंद्र भगवान की