चान्दनी रात में तुझ पूछ पुकारू
संदुर्टों में मैं ही मारूं
देवसी में दिल ये हारे
चुकके चुकके अश्कों से हारे
आजा मेरी नीदों में
खाबों के दुनियां सचाऊं
दर्द के बोल अब नगुनाऊं
तेरे से ख़द को बुलाऊं
सितारों के चादर में छुप जाओं करे दिल की धरकनें सुन पाओं
करे बना तोरी
सिंदगी
मेरे दिल की अब यही सचाई
आसूं की
वहरे अब पहियां
भूल नहीं बाकी तुझे ये राते
तेरी याद में मैं सिमट जाओं खुश्बू में तेरी लपट जाओं
आजा मेरी
मीदों में
खाबों की दुनियां सचाऊं
दर्द के बोल बन बुलाऊं
तेरे समाद को बुलाऊं
सितारों के चादर में छुप जाओं करे दिल की धरकनें सुन पाओं
करे दिना
थोरी
संद्गी मेरे दिल की अब
यही सचाई