राम चरा चरके है इश्वर।
राम है जगत पती जगदिश्वर।
राम जगत के है उद्धारक।
राम आदि है, राम अंत है.
राम सियापति रमापन्त है.
राम धरा है, राम गगन है,
राम नाम में संत मगन है,
जडचेतन में राम समाये।
राम है तीनों लोक बिछाये।
राम सभी जीवों के पालक,
राम विश्व के हैं संचालक,
राम धर्म के सगुण रूप हैं।
राम सच्चिदानन्द भूप है।
राम है मर्यादा पुर्शोतम,
निर्विकार निर्मल सर्वोतम,
राम सरल हैं। जल की भाती अतीव तरल हैं। विद्ध्याओं के सागर हैं ये,
ज्यान गुणों में आगर हैं ये,
सर्वशक्त सामर्तवान हैं। राम प्रभू सबसे बहान है।
वेद बेन का पार न पाए,
नेति नेति कहकर गुण गाए।
राम प्रभू को बस वो
जानें। यो इनको ही
सबकुछ मानें।
बलवानों के बल में हैं ये,
यग्याद इस थल में हैं ये,
इन में है ब्रह्माणड समाया।
अपपार है इनकी माया। निर्मल नित्य निरंजन है ये,
वीशन भवए बंजन है ये,
सुर नर मुनी इनका गुण गाते। पार ब्रह्म परमेश्वर हैं ये,
अखिलेश्वर सर्वेश्वर हैं ये,
नर्श्वरूप में नारायन हैं।
राम स्वयम नी रामायन है।
चारो वेद पुराण का एक यही है साथ।
राम नाम ही जीव का है पावन आधार।
कहीं धूप तो कहीं पे चाया ये है राम प्रभू की माया।
मंगल भवन अमंगल हारी। राम प्रभू है जग उपतारी।
राम प्रभू की शोभान्यारी।
बाम भाग में सीता मईया।
सेवा में है तीनो भईया।
हनुमान जी चरण दबाते।
अपना जीवन धन्य बनाते।
कमल समान नेत्र है सुन्दर।
दिव्य चटाती हु लोक ओ जागर। कोटी काम देव को लाजे। ऐसी चजी राम की
साजे। शीश मकुट अती चमचमचमके। रूप मनोहर दमडमडमके। गलेश शोबित है वनमाला।
देव समान केश है खाला। कोटी चंद्रम कोटी दिवाकर। पाते हैं प्रकार।
काशनित आकर जै रगपुल भूशन रगुनन्दन। संत्र जनोपे मस्तक जन्दन। बल्वानों
के बल हो तुम ही परम समर्थ। सबल हो तुम ही तुम पर निर्भर शृष्टी सारी।
जै संकत मोचन भयारी। काम क्रोद मदलोह मिटाओ। विशयों से अब हमें बचाओ�
जै नागत है रगुनायक। अब पर अपने परिपा करो शुक्रितायक।
हे
आनन्द कंद करणा कर। आवध बिहारी प्रभुसीताबत।
सदा सदा चरणों में बंधन। हे कीशव माधव मदुसूदन।
श्वामी सो भाग्य प्रदाता। भगत जनों के
भाग्य विदाता। निर्मल बुद्धी करने वाले।
माया पाधम हरने वाले। जो जन भक्ती भव
से सदा भज श्रीराम। उनका पल में दूर हो
कश्ट कलेश तमाम।
राम नाम है अमरित प्याला। राम नाम है सब से आला। राम
नाम की रटन लगालो। अन्मेबावन जोति जगालो। यह जोति
अज्ञान मिटाए। अंधकार को दूर भगाए। यही जोति जब मन में जलती।
तम सारी विपदा है डलती। यही जोति जीवों की मुक्ती। यही जोति है
शाश्वत शक्ती। इसी जोति में श्रिष्टि समाई। इसी जोति की सकल बढाई।
ने खुशण जोति तेखे धूपली ।
लगन लगी तब घर परिवार चोड कर सारा।
पालक जंगल और सिधारा।
राम नाम में ध्यान लगाकर,
बैठ गए ध्रोवन में जाकर,
शगुन रूप का धर्शन पाया।
यश्टी लो लोपों में छाया।
तन में राम है, मन में राम है,
यश्टी के कन कन में राम है,
अन्तर के पट को अब खोलो।
राम नाम के जिवा से बोलो। राम नाम ही पूर्ण है,
राम नाम सुख धाम।
राम नाम के जाप से मिलता है विश्राम।
राम नाम के जाप से मिलता है विश्राम।
बालमें जाकर पूछा सब को पास बुलाकर,
सबने ही मुँ फेर लिया है। साफ साफ इनकार
किया दैना। ज्यान प्रकाश रिदै में जागा,
रतना करने घर को त्यागा। राम नाम रिशीयों से पाकर।
बालमें की पेवे रतना कर। नाम प्रभाव जगत ने जाना।
बालमें की भै ब्रह्मस समाना, जब अपनी लेकनी उठाई।
राम नाम की महिमा गाई।
राम नाम समनाम न दोजा, राम नाम है साधन पूजा।
राम नाम का करके बंदन।
प्रतं पूज्य भै घरि जानन्दन।
जब सदन कसाई भवसागर से उत्राजाई
राम नाम है जल मे थल मे
राम नाम जब शिव कैलाशी भयें मरिद्यून जै प्रभु अविनाशी
रोम रोम में नाम बसा कर
आम प्रभाव सती ने जाना
लेकिन इस सत्य को न माना
सती ने जो अपराद किया है
ओदे शिव ने त्याग दिया है
इसी पाप को पिता भवन में
तिरसकार चुब गया है मन में
उदा यग में प्राण गवाया
छारों और शोक है छारा
गौराने श्री राम का जप कर पावन नाम सदा
सदा शिव के निकट पाया है शुबधाम
राम नाम है सत्य सनातन राम नाम जीने का साधन राम नाम है मंगल कारी
राम नाम ब्रह्मः ने जप कर पूर्ण किया
सुरिश्टी को रच कर राम नाम जपते हैं योगी
जब ना पाया कहीं सहारा तो फिर गज ने नाम उचारा राम नाम ने कष्ट मिटाया
राह से गज को मुप्त कराया
राम नाम है जल में थल में ब्रह्म लोक पाताल सुतल में
राम नाम छौदा भुवनों में राम नाम है नील गगन में
राम नाम गंगा की धारा इसने लाखों को है तारा
जो इस गंगा तट पर आए जल बापों से मुप्ती पाए राम नाम है मेथा
मधुर रस है सुक सारा इसके ही वस जिसने इसका पान किया है उसने
जीवन मस्त जिया है राम नाम है मूल संजीवन कलपलताओं का पावनवन
राम नाम दुख दोश मिठाए अपने गाल मेराह दिकाए
राम नाम चिंता मनि सुन्द जो चिंताओं को लेता हर
राम नाम हर विपदा टाले जीवन करते राम हवाले
कलातित कल्यान प्रदाता राम सभी के है पितु माता
राम अंत है राम शुरू है राम प्रभात काल की बेला
राम नाम है अति अलबेला राम कता है अति सुक्ख दाई
इसको शवन करो नितभाई
महिमा है श्रीराम की
अद्बुत और अपार
सुनियच रजनामान है
जिनके विमल विचार
ज्यान और
विज्ञान राम है
सभी गुणों के खान राम है राम ब्रह्म परमेश्वर रूपा
अपत अबात अनाधे रूपा
अवधपुरी में दशरत के घर चार अंश से जनमे जाकर बाजे चारो और बधाई
तैरपुरायक तैरपुराई
पल्पकाल में विध्या पाकर अवधपुरी में आये रगवर विश्वमित्र के संग पधारे
खलमारीच सुबाहू आया करने लगा अनेको
माया राम प्रभूने बान चलाया
गौतम रिशी के आश्रम जाकर पत्तर पर पध
कंज चुवाकर नारी अहिल्या को है तारा
पिता बचन को सिर पर धरकर सीता लखन सहित श्रीरगवर वन में जाकर कुटी बनाएं
संग जनू के ताद सजाएं
देवान तक तुरशिरा को मारा
कुम्भ करण को है संगारा
रावन का संगार किया है
देवोने जैतार किया है
राघव बने अवध के राजा
तीनो लोक में डंका बाजा
देहिक देविक भोतिक तापा
राज में कभी न व्यापा
सत्य धरम का रूप सजाया
मर्यादा का पाथ पढाया
उच नीच का भेद मिटाया
रावन सब को बले लगाया
जिसके मन में भाव नहीं है
दया धरम की छाव नहीं है
राम उसे कैसे स्विकारे
राम वहाँ जाते नहीं जहाँ प्रपंच समाज
राम वहीं पर राजते जहाँ धरम का राज
राम नाम सबरी ने
पाया मिटी मोह की सारी छाया जंगल में ही वास बनाया
राम प्रभूने वन में जाकर जूटे बेर भाव से खाकर नवदा भकती ग्यान सिखाया
नाम हनुमत ने गाया, नाम जपा सुगरीव ने सादर।
आया राज का जयती आदर।
दंडक वन हो गया सुहावन,
पाउपडा रघुवर का पावन,
मिटा श्राप मुनिवर का भारी।
जैखो शत्मती अवध बिहारी।
जाजा मिल गज कनिकाऊ,
मुक्त भये सब जान प्रभाओ। राम नाम की अत्प्रभुताई।
शेश शारि दास करिनागाई। यज्यपती यदुपती योगेश्वर,
राम स्वयं है प्रभुदेवेश्वर,
राम ख्षीर सागर के वासी।
लश्मी फति वै पुंत निवासी।
राम नाम का पाई प्रसादा, भक्त शरो मनिते प्रहलादा।
चहुँ जुग तीन कालती हु लोका। राम भजे सोभये विजोखा।
राम भक्त से यंभी डरते, हात जोड कर विनती करते,
राम भक्त के साती संगी। पवण पुंत भाला
बजरंगी। पक्त विभीशन ने तप द्वारा,
राम नाम पाया अति प्यारा,
जब सब ने ही था ठुकराया। अग्यावग ने धले लगाया।
पड़े सागर ऊपर तैर गए हैं भारी पथर,
महा मंत्र है नाम राम का।
ये विशाग्ज़े में पड़ी काम ता।
राम नाम जपते रहो निशि दिन आठो याम,
कज सवारेंगे सभी सीतपति श्रीराम।
राम है सारे पाप विनाशक, राम नाम है
ज्ञान प्रकाशक, राम नाम
पारस की शक्ति।
राम नाम है नबधा भक्ति। मतस्य कुर्म वरा अवतारी,
राम स्वयम है अजिर विहारी,
नरहरी रूप बना कर आये,
राम उश्वो स्वर्ध पताये,
दानवीर राजा बली द्वारे,
वामन बनकर राम पधारे,
दो पग में सब नाप लिया है,
राम को पावन लोप दिया है,
पर्शुराम श्रीराम कहाई,
पापर में मोहन बनाए,
जब जब पाप धरा परचाया,
राम को ने अगर भित रूप बनाया,
जूटे हैं ये रिष्टे नाते,
माया में दिन रात फसाते,
इन सब से बाहर आजाओ,
राम नाम को निस दिन गाओ,
सांसों की मालाओं में भी चाजाने दो,
राम नाम ही रोम रोम जब नाम पुकारे,
तभी वड़ेंगे ताज तुमारे,
राम नाम हिरदय में धारो,
सोते जागते नाम उचारो,
स्वप्न समान है ये जग सारा,
राम नाम में खो जाओगे,
सबके प्यारे हो जाओगे,
मान और सम्मान मिलेगा,
रोग दोशदा रिद्र मिटेगा,
संकट का हर मेग छटेगा,
खुश हाली से घर जूमेगा,
यश्वेभ अम्बर जूमेगा,
राम नाम की अम्रित धारा,
हरे कश्ट कल युग का सारा,
जो ये अम्रित पान करेगा,
वह सागर सहज करेगा, करता है सानन्द नित,
राम नाम का गान,
हे राघव पदकंज में दो इसको इस्थान.