گن گو بند گائو نہیں
جنم یکارت کی ناں
کہو نانک اور پجمناں
جہ بد جل کومی ناں
بکھے انسیوں کہاں
رچھے ہو
ترنا پو یاں ہی گئیو
ترنا پو یاں ہی گئیو لیو ذرا تن جیتاں
ہر مطاع آودھٹا تھا بیتاں
ہر مطاع آودھٹا تھا بیتاں
آودھٹے کیوں نپجے پگواناں
تنداراں سمپت سگل جن اپنی کرماناں
مجھے کچھ سنگی نہیں
نانک ساچی جاناں
پتی تو دارن
پہارن
ہر
یناتھ کے ناتھ
کہو نانک تے جانی اے صدا بست تم ساتھ
تند تند جیتاں کہو دیو تاسیوں نے او نکیناں
کہو نانک نرباو رے اب کیوں
ڈولت دیناں
تند تند سمپے سکھ دیو ہر جہنی کے تاماں
کہو نانک سن رے مناں
سمرت کہے نا راماں سب سکھ داتا رام ہے
دوسر نہ ہے ن کوئی
جہ سمرت گت پائی اے
تے پجرے تے میتاں
کہو نانک سن رے مناں آدھ کٹت ہے نیتاں
آج تت کو تن رچیو
جانو چطرس جاناں
جہتے اپ جو نانکاں لین تاہے میماناں
کٹ کٹ میں ہر جو بسے سنتن کہو پکاراں
کہو نانک تے پجرے مناں تاہو ندیت رہ پاراں
سکھ دکھ جے پرسے نہیں لوگوں ابیماناں
کہو نانک سن رے مناں سمورت پگواناں
سمورت پگواناں
اس تت ننج آناں ہی جے
کنچن لوح سماناں
کہو نانک سن رے مناں
مکت تاہے تے جاناں
ہر کھسوگ جا کے نہیں بیری نیت سماناں
مکت تاہے تے جاناں پہ کھاو کو دیت نیھے پہ
مانت آناں
گیاں نیتاہے بخاں آناں
सुनरे मना तेही नारुमात है पाग
जेह माया मम्तात जी
सब ते पयो युदास
सुनरे मना
तेही कट ब्रह्म निवास
जेह प्राणी हो
मैंत जी
करताराम पचान
नानक वह मुकत नार एह मन साची मान
पहला सन
दुरमत हरन कलवे हर को नाम
इस दिन जो नानक पज़े सफलो वाला जी पचान
जो प्राणी मम्तान्ग जै लोबो अहंकार को नानक आपन तरे आउरनलेत युदार
जो
सुपना यर पेखना
यैसे जग को जाना
इन मैं कच साचो नहीं नानक बिन पगवान
विस्दिन माया कारने प्राणी
डोलत नीत कोटन मैं नानक पूछू
नारायन
जैचीता जैसे जलते
बुदबुदा
उप जैबिन सैनीता
तैसे रची
कोहो नानक सुनमीत प्राणी कचू नचेत
इमद माया कै अंद
नानक बिन हर पजन परत तहे जम फंद
जो सुख कोचा है सदा सर्णराम कीले हा
सुनरे मना दुर लब मान खुदे हा
माया कारन तावही मूरक लोग यजान
कोहो नानक बिन हर पजन
दिर्था जनम सिरान जो प्राणी निस दिन पजै रूप राम ते जान
हर जन हर
यंतर नहीं
नानक साची मान मन माया में फद रहो विस्रियो गोविद नाम
जनम जनम परमत फिरयो
लिट्टयो नजम कोत्रास
पाव ये बास
जतन बहुत मैं कर रहेओ इत्यो नामन को मान दुरमत
स्यो नानक फद राख लेओ पगवान
बाल जुवनियर विर्दफण तीन वस्ता जान
कहो नानक हर पजन बेन विर्था सब ही मान
करनोह तो सोना कियो तरे ओ लोग कफन्द
नानक समयो रम गयो
रोवत यंद
मान बाया मैं रम रहेओ
निकसत नाहेन मीत
जो छाड़ित नाहेन
पीत नर
चाहत कच्छे आर आउरे की आउरे पई
जगत पिखारी फिरत हैं सब को दाता राम
कहो नानक मान से वलते हैं उर्नोवै काम
तुमने जो जाना इन मैं कच्छे तेरो नहीं
नानक कहे उबखाना गर्भ करत है देहको
नानक ते जग जीत
जेह कट से मरन राम को सोनर मुक्दा जाना
है मन जैसे सूकर स्वान नानक
मानोता है तन
वामी को ग्रहो जो सदा स्वान
तजत नहीं तद
नानक ले बिद्धर पज़े ओ एक मान होए एक चित
पीरत भरत वरदान कर
मन मैं तरह गुमान नानक ने फल जातत है
पिछ कर देखो जगत मैं
उका उको नाहे नानक धिरहर
पगत है तेरा को मन माहे
जग रचन सब चूठ है जान ले ओ रे मीत
कहनान कथिर नार है जो बालू की पीत
राम गयो रावन गयो जाको बहव परवार
चिन्ता ता की कीजिये जो अनोनी होई एह मारग संसार को नानक
थिर नहीं कोई
जूप जो सो विर्स है परवास कै काल नानक हर गुन गाईले छाड सगल जंजाल
बल छुट क्यो
बंदन परे
कचु न होत यूपाई कहो नानक यब यूट हर
गज जो
होस हाई
परवास कै काल नानक हर गुन गाईले छाड सगल जंजाल
बंदन परे कचु न होत यूपाई
नानक सब किछ तुम्हरे हात में तुम ही होत सहाई
संग सखा सब ताजिगए कोई ननि भे हो साथ कहो
नानक वे बिपत में एक टेक रगुनाथ
नाम रहे यो साधू रहे यो रहे यो गुर्गो
बिंद कहो नानक वे जगत में किन जपयो
गुर्बंद राम नाम योर मैं गहे ओम
जेहे सिमरत संकट मिटाएं
दर्स तुहारो होईं