आज परिशान हो बाईल बाने
नया बाड़ू जवानी तो आड़ बाईल बाटे पहारू
बड़ी सतावता वाड़ी ये भावजी बोनवाली जाड़ो
घर्वा में हब के बनागे बहरतीया लागल बाड़े उकमाले मरतीया
हाम
एक महीना भरे भावती लूटे डॉलारो
बाकि पूरा साल भया रहेले तो आरो तो काटन संभाई
जायब घरे जने डॉलाया गे पीछे
अईलाहा उनही पचतो खेचे
अधुनो मधोरी आमोला वाता रहा
संजन कुछ शमझवाता रहा
खाले साजन के गाना पज़वता रहा
सहे खेलते ने दूसरा के दावता रहा
अब हमरो लगता के दूसरा ही से दावाए के पड़ी