कैसे बताऊंगी दास्ता
तुही बता क्या हुआ
रातों में बाते होती रही
तुछ को मैं चाहने लगा
जाने कैसे हम तो मिले थे जब वहाँ
होते होते प्यार हो गया
भीगी हुई सी वो शाम थी
चाय बहाना ही था
नजरों से बाते होने लगी
तुरे था मा मेरा हाथ
दिल में जो ये बाते थी मैं तुम से
कह गया होते होते प्यार हो गया
जाने कैसे हम तो मिले थे जब वहाँ
होते होते प्यार हो गया
जाने कैसे हम तो मिले थे जब वहाँ