पाइस अप्रेल भारत के इतिहास के पन्ना में ओ खोफनाक दिन,
ओ बहलगाम के धरती जवन केतना बेगुनाह के खुन से रंग दियल गई।
ओ तमाम सहीत के सरधाञली देते हुए ओ दुस्मनत की जबाब
हम भेचर हलबानी की जब भारत के उगर नव जवान होई,
पाकिस्तान के हर गली में समसान होई,
कास्मीर लेवे के ते सपना छोड़ दे,
नातर लहोर कराची में भी भारत के मकान होई।
पूछे पूछे के धरम जाना, लेई लेलस का ताना,
जमू का समीर पहन गम के हग हटाना।
जमू का समीर पहन गम के हग हटाना।
हिंदु धरम पतंकी कैले बावार,
एकारापो मुदी चाचा करा तू भिचार।
हिंदु धरम पतंकी कैले बावार,
हिंदु धरम पतंकी कैले बावार,
हिंदु धरम पतंकी कैले बावार,
हिंदु
धरम पतंकी कैले बावार,
हिंदु धरम पतंकी कैले बावार,