स्वर्ग में कैसे मिले परमपद वो बतलाता हूँ
पावन कथा सुनाता हूँ
निरजला एकदशी की भक्तों कथा सुनाता हूँ
मैं क्धा cube
माहा बली बल्वान भीम जी पहुँचे व्यास के पास
भुजा भुजा सा छेहरा था उनका लगते बड़े उदास
करके भ्यास के चरण वंदना बैठ गए बल्वान
देख भीम को इस हालत में भ्यास हुए हैरान
भ्यास भीम से पूच रहे हैं कुशल छेम सब हाल
किस कारण मुर जाए हो तुम किस का तुमें मलाल
कारण बहुत बड़ा ले करके आया आपके पास कश्ट
निवारण कर दो भ्यास जी करना नहीं निराश
हाथ जोड़ कर अपनी सारी व्यता सुनाता हूँ मैं तो कथा सुनाता हूँ
निरजलआ एकदशी की भक्तों कथा सुनाता हूँ मैं कथा सुनाता हूं
ये कथा है बड़ी महाण सब सुनो लगाके ध्यान
इशकता की है पहचान, मिले मोह मांगा वरदान
हसी आ गई तुरंट व्यास को सुनके भीम की बात
बड़े प्रेम से भीम के सिर पर रखा व्यास में हाथ
कथिन समस्या है ये तुम्हारी समझ गया हूं मैं
मन से निकाल फेक दो अपने भूख प्यास का भै
रोनी सी हो गई थी सूरत सुनके व्यास की बात
भूखे नहीं मैं रह सकता हूं भीमन जोडे हार
दान पुन मैं खूब करूँगा करूँगा पूजा पाठ वासुदेव
भगवान का वंदन करूँगा मैं दिन राट लेकिन भोजन करूँगा
प्रति दिन सत्य बताता हूं मैं कथा सुनाता हूं
निर्जल एकदशी की भक्तों कथा सुनाता हूं मैं कथा सुनाता हूं
ये कथा है बड़ी महाण सब सुनो लगाके ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुहवांगा वरदान
मुस्काते हुए व्यास जी बोले सुनो लगाके ध्यान
अगर तुम्हें है स्वर्ग की इख्शा सुनो भीम बलवान
माह की दोनों एकदशी का वरद रखना होगा
सारे नियमों का तुमको पालन करना होगा
सुनके बाते भीम व्यास की बोले हैं करजोड
वरत की सुनके मेरे पेट में उठने लगी मडोर
तीनों समय का खाने वाला कैस रखे उपवास
कोई दूजा यतन बता दो है महाँ ज्यानी व्यास
मेरे भार्वाषमन्त उपवास के नाम से ही तो मैं घब्राता हूं
वाँगा वरदान
भीम के ऊपर दया आ गई हसे व्यास महराज
एक सरल वरद तुम्हें बताओं भीम बली मैं आज
भूझन करना जब असनान तो थोड़ा जल भी करना ग्रहन
सुनान आच मन में जऽन को तुम गृहन तो कर सकते
सत्य कहूं मैं भींम अनं को चू नहीं तुम सकते
आईसा करनेसे क्या होगा वो समझाता हूं
मैं कथा सुनाता हूं
निरजल एक बकतों कथा सुन soothing
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मोह मांगा वरदान
चेस्त की एकदशी का वरत करना जीवन पर यंत
भीम तुम्हारे सब पाकों का हो जाएगा अंत
गौकादान ही महादान है करना गौकादान
भला करेंगे सदा तुम्हारा वासुदेब भगवान
व्यास की आज्या मान भीम फिर घर को आते हैं
जेस्ठ मास की एकदशी का नियम निभाते हैं
निरजल रहके भीम सेन ने रखा है फिर उपवास
पुर्वकाल के पाप दोस सब हो जाते हैं नाश
हाज जोड देवेस व्यास कोशीश जुकाता हूं मैं कथा सुनाता हूं
निरजल एकदशी की भक्तों कथा सुनाता हूं मैं कथा सुनाता हूं
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगाके ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मोह मांगा वरदान