अरे वाद रहो बाईले की जीनगी
जीनल जाई हस के, वाद रहो बाईले की जीनगी
जीनल जाई हस के, तब काए मराले ने बाडू
मुख का दिल पक खोस के, तब काए मराले ने बाडू
दुनिये देखावें के कहलू हमारा
से फसके
तब काहे मौरा लेरे बारू
तब काहे मौरा लेरे बारू
मूका दिल पा कोई के
नासात उध्हाराई देलू हमारा के दारू के
सापना न पूरा कोई लूबोनी में हारा रूके
कहलू की हो न तंखी आई
रोटी घीव में घोसके
तब काहे मौरा लेरे बारू
मूका दिल पा कोई के
इने जान जान
रहू जब बहरा सके तब काहे मौरा लेरे बारू