मसिबाई महादेव उस्तुयो।
आयो कोनी
आवने वालो मारा
विल्लीडाम प्रेम जगावने वालो
आयो कोनी आवने वालो मारे रातार नींद चुरावने वालो
थारी राह निहारों थारे बिना दिल नहीं माने
थारी राह निहारों
आहू मैं तो धारे कातिर आहू सजनी बीत निवाऊ
तासू मैं वादो निवाऊ
रोज थारी पोटो देखू तुमारी जान सजनी
तासू मिलने आहू तासू वादो निवाऊ निवाऊ
जूखो
प्रेमजगागने वालो माने
सपना में धोड़े गयो
धोड़े गयो गुंगट में जूधेखू थाने निजरारों मेल होयो
दिलरी धड़कन सुनने भी तू मासू नहीं बोल पायो
पागल होगई थारी यात में दलिया लागे सूनी माने
नावे साजन नेनाः सुनीर धड़के आयो कोनी
आवने वालो मारा भिल्लेडाम प्रेमजगागने वालो
साथ सजाऊं सपना
में पिका पेत रभिन्डा लागे
काम में मन नहीं लागे
मारो
दिलडो हात सुझावे
मारो छिदर भिजाऊं गलियों में मैसूस करूं
मैं थारी कुस्बुहारी बातां प्यारी लागे
इतरो मत तडबा यब सजनी थारी आत मेराता काटों यब तो चैन नहीं आवे
आहु मैं तथारे कतिर याऊं थासु में बातो निभाऊं
राता में नीन कोनी आवे साजन जांजर थनक जावे सौभारा मैं चालू एकली
मारो दिलडो धडक सुझावे जुरुजुर रूँ थारी आत में नेना रोकाजड़ियों जावे
आयो कोनी आवने वालो मारा बिलडा में प्रेम जगावने वालो
मारे दिल में बसे तू सजनी दिलरी तू ही है मारी धडकन
थारे बिन में कुछ नहीं सजनी मारी
आहे जिन्दगानी
तुझसे चोड़ू प्रीत की दोरी सुन मारी तू प्यारी सजनी
थारी आकरो आसू पीलू आजा थारे कहातिर जीलू
इवडासू तू लगजा मारे छोड दिलाज रूयो बंदन
आहू मैं तुधारे कहतिर आहू
थासू में बातो निबाऊं
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