चोल नपाता कमाई हो
ज़टा मैं कहाँ वो राई
ज़टा मैं कहाँ वो राई हो
अन्धुत पीठोंनाय다는ा करते।
हांसं बंदि मारीचो.
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जटव कहाँ वराई हो आजूल दिहलो नाही ये सइया पिकुली ये गोले आई हो
देता रोह कामाई बोला कवना मुझे आजारी के
देता रोह कामाई बोला कवना मुझे आजारी के
छोड़ी के घोर में में हर साही यहां देखेला नाच नाचनीया के
बड़ी बड़ो से लफी से रह जहां बुझाना दारद कणिया के
लागोत सुनभत धाई ले बाद कमना
कुखेलाडी के
देता रोह कामाई बोला कमना मुझे आजारी के
देता रोह कामाई बोला कमना मुझे आजारी के
भोईल तु बाड़ो हे हर यविकी तो नीन माना हो बात के
साझे के गोईल यहो रह जहाई आवल राधी रात के
अरे बेटा जो यह तनो चले हग जोटा