मिले खाती राती
मिले खाती राती
आई के जारा मैं मुर्म जन्वा के मारा ला
मुर्म जन्वा के मारा ला
मुर्म जन्वा के मारा ला
मैं मुर्म जन्वा के मारा ला
महन कर महर जाई खाई के जारा ला
मैं मुर्म जन्वा के मारा ला
मुर्म जन्वा के मारा ला
जाओ ना घड़ी छाच पबारारी रहुए चरहल, निल कमल भी बेहकी जी के मन राहे बहर हल
पुलल बाटे योखिया, तो ही कारे सखिया, हमारो के सुनी ठासे जरहल
महन कर महर जाई खाई के जहरा बाहर, माई मुर्म जानु आके मारा बाहर
महन कर महन कर माई मुर्म जानु आके मारा बाहर