जरा सिंगर्दो खिनी दिगे ओछे सुन्नो गोडो
पाखे ओछे नो गाऊ मोही पुरो
सुन्नो गोडो ठारो सुन्नो गोडो नो दीरी ना मोहेला
सुन्नो गोडो नो दी बोली विख्यात होईला
सुन्नो गोडो नो दी कुले ओछे महुल गछो
से महुल गछो करोरे पाट ख़टा ओछंतो
देखो से तीनी मुरती महुल गछो करोरे
पाट ख़टा ओछंतो देखो से तीनी मुरती महुल गछो करोरे
राजा तीनी मुरती के तो जेन खाने थापिले
से जगा के देज़ार बोली नाम सते देले
दे अर्था तोई जे सकलो देबता
जार अर्था जे जंगलो सुनो आहे सुरता
जगा के
देज़ार बोली नाम सते देखो से जगा के
देज़ार बोली नाम सते देखो
आमा इस शर्त रोखी थीले पात सेदर पात सारी आगो देबो हेले
एको थेरे राजा आऊमा पातने स्वरी आँमा पातने स्वरी
राजी होई पतना गढ के जाई थीले तो फिरी से दिनू तो पातने स्वरी
सिंदुराऊ सारी जड़ा गढ के पठा संतोतीयारी
पातने स्वरी पात सिंदुराऊ तान कर पात सारी
पहला पात खोना देवी के देशन काटी कोरी
पात सिंदुर पात सारी पातना गढू आणी पात खोना देवता के तो चड़ा संथा जाणी
बुड़ी आया देशन सिंदुर सारी आणी आहा सिंदुर सारी आणी
पड़ा संपत्खणा के तो परिणदाईनी देखोतीनी मुरती
के पात सिंदुर लगाई पात सारी के तो देशन फिन्धाई
पोजी उतानु जाना सोहलो दिन औरे पात खणडा पुजा हुए से आठो दिन औरे
पोजी उतानु जाना सोहलो दिन अभीतोरे तो सबतोनी दिन औरे
पात सिंदुर उना जैसी सुनो सुग्योन औरे
पात सिंदुर पात सारी बरण रपाईं
जराशिण ग्राम चलो चल चल भुवई
की हरी बलो बाट बरण को सन जाई गामुण्डो
पात सिंदुर पातो सारी आशीले
मंदीरे नुआ छतर सीला जैसी बुझह सुग्योन औरे
बजा गजा बजेई हरी बोलो लोहूली
बात बरण तो हैसी पुझारी देहरी
धुल मुरी पुझा हैसी खलारे रखाई
मुर्ती कुपिन्धाई 32 जन
पुझारी अदे जहरो के जाईना
छतर गाडी
पुझा करसन बरुआ डाकीना
कोहेला बरुआ जैसी महानुंदो खोला ता पोरे राजांकर
खोला साहानी बोहेला
साहानी मिशाई उच्छो बारो खोला बरुआ के धोरीने सुन राजातो खोहेला
बीजोया
दोस्मीनो पंछो दीनो जात्रा हैसी दुनियारो रोगो दुखो मा बुहीने सी
जात्रा सारी आठो दिने एसी आठ मंगोला
मुर्तिये आशी पाटो खुण्डा करंती जे लिला
32 जनों देज़ारो रुआ संती
जे चाली
उठूल घाटे मुर्ति थोई देइ हु लहूली
देधानों बराफी ताके आए संतो चाली
बिसी घरो खोला थारे विष्रामों जे करी
आरो दिनो है सीलिंगा बरणों जे पूजा
चरा सिंघा गडे देखो बांधीको तुइ धोजा
भीरु पानी जे ना पुढा
पुजा सारी कोरी
होती सदे हुरी पातो खुण्डाना मधोरी
नमस्ते नमस्ते मागो जगत जननी
संती मोई जगत माता सक्तिष्वरुपीनी
तु अटू जनने सत्तर जतमरुपी
चन्म करी माता रुपी बुलाऊ
जगती
देऊ जया रुपे प्रिती आनन्द मनारे
सेसे बालीका रुपरे सहारु खरपरे गऊऊरी परवती तुही दुर्गा होई मभती
पिंगुला कालीका तुही अटू मोहा सती
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