चै माता दिवा
भक्त जनो
नवरात्र के दूसरे दिन
मा ब्रह्म चाण्नी रूप की पूजा की जाती है
आज मैं आपको मा ब्रह्म चाण्नी की महिमा सुनाने जा रहा हूँ
इस कथा के माध्यम से
आदी सत्ती मानों दुर्गा कोशी सुनवाते हैं
हमशी सुनवाते हैनं didnt पर्म हुचार
moderation का व्रितन्त अपना ते हैं,
हमशी सुनवाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
आधि सत्ति मा नौ दुर्गा कोशी सुनवाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
करू नौ दुर्गा का ध्यार
हो जाएगा कल्यार
हो जाएगा कल्यार
करू नौ दुर्गा का ध्यार
माता ब्रह्मचार्णी का स्वरूप उनके नाम के ही अनुरूप हैं
कमंडल और मालाधार्णी माता के मनोहा रूप का वण्नन
अब मैं इस कथा के माध्यम से आप सभी को सुनाने जा रहा हूं
तो बोलिए जै माता दी
कथा सुनाओ आदि सत्य की मा ब्रह्मचार्णी की
तपश्चार्णी जगदं बाकी कश्ट हारणी की
बाये हाथ में लेक कमंडल दाए में
मालाँ सुन्दर रूप मनोहर माका है मम्तावाला
नारत जी ने उपदेस दिया था और दिया था ग्याँ
तप से तुमको मिल जाएंगे सिवसंकर भगवान
करो साधना सिवसंकर की मानो मेरी बाद
सत्य कथन है मेरा तुमको मिलेंगे भूलेना
ध्यान लगाके सुनो में आगे कथा बढ़ाते हैं
करो नो स्राज धर्वान एक अगर
उजाएगा कल्वयार करूनो दुर्गा का ध्यार।
प्रतियार ये कुछ गजानी तरह करता है ये जानती
चुज़ायेगा कल्वयार करूनो दुर्गा का ध्यार।
ब्रह्म चान्डि रूप में क्यूं प्रकट हुए और इसके तीछे कौन सी पौरारी
कथा है इसका वणन मैं आगे आप सभी को इस कथा के माध्यम से बताता हूँ।
पुर्व जनम में दक्ष की पुत्री ये कहलाई थी
हमन कुंड में कूद के अपनी जान गवाई थी
दूजे जनम में कैसे पढ़ा था ब्रह्म चार नी नाम
कैसे पूरन करती थी अपने भक्तों का काम
शिवशंकर को मन में धर करती थी तप भारी
हिरदै पटल में बसे थे उनके सम्हूत्री पुरारी
गोर तपस्या करने लगी मा जंगल में जाकर
वरस हजार गुजार दिये थे कंद मूल खाकर
गोर तपस्या की तुमको कुछ अंस दिखाते हैं हम कथा सुनाते हैं
ब्रह्मचारणी माता कावरी तांत दिखाते हैं हम सीस नवाते हैं
करो नौदुरगा का ध्यार हो जाएगा कल्यार
आधी वरसा सर्दी गर्मी सब कुछ सेहन किया
वरसों बीट गए तप करते कभी न सेहन किया
लगन लगी सिवशंकर से मन में बसी थी प्रीम
मन में था विश्वास एक दिन होगी मेरी जीव
सौव वरसों तक जगजननी ने खाये केवल साथ
उसी तरह से कथिन तपस्या करती थी दिन, राथ
वरसों तक माँ जगजननी ने रखा था उपवास
सिवशंकर की चाह में उनको भूख लगे न प्याँ
वरस हजारों कैसे बीते हो दिखलाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
ब्रह्मचारनी माता कावेतांत सुनाते हैं
हम उसी सुनवाते हैं
करो नौ दुर्गा का ध्यार
हो जाएगा तल्यार
हो जाएगा तल्यार करो नौ दुर्गा का ध्यार
तीन हजार वरस तक माने बेल पत्र खाए
नीराहार मानिर जल रहके तप करती जाए
बिन कुछ खाए पीए वरसो इउं गुजरे कई हजार
आधी गर्मी सर्दी सहती बारिस की बौच्छा
सिव के खातिर माने पत्र भिखाना छोड़ दिया
नाम अरपड मईया का इसलिए
पढ़ा
तप करने में मा के आगे कोई नहीं बढ़ा
इसलिए तो मा का नाम ब्रह्मचार नी पढ़ा
हो गई थी कम जोड मा ओ पतलाते हैं
हम कथा सुनाते हैं ब्रह्मचार नी माता का
वेतांत सुनाते हैं हम उसी सुनवाते हैं
करुनो दुर्गा का ध्यार भो जाएगा तल्यार
करुनो दुरगा का ध्यार
वर्षों तक कथिन तप में लीन रहीं
कथिन तपस्या के कारण से तन हो गया थची
लगने लगी मा धाचे जैसी बदन हो गया जी
रिशी मुनी संग आए देवता तब माते के पास
हाथ जोड बोले सब मा से तोड दो अब उपवास
जैसी तपस्या की हूं तुमने किसी ने भी ना की
अब तक हमने तपस्यार नी तुमसी ना देखी
हुई साधना पूरी जप और तपसे परीपूर
मनों कामना हो जाएगी जल्दी सी संपूर
प्रती रूप में सिव जी मिलेंगे सत्य बताते हैं
हम कथा सुनाते हैं ब्रह्मचारिनी माता कावेतांत सुनाते हैं
हम सी सुनवाते हैं
करो नो दुर्गा का ध्यार हो जाएगा कल्यार
वर्स हजारों बिता दिये कथिन साधना में
कमी नहीं है कोई तुम्हारी दिप्य प्रात्णा में
ब्रह्मचारिनी तुम्ही अपड़ना हो सिव संकर की तुम हो भार्या
तुमझी रमना हो प्रति दिन तुमको नमन करेगा सारा ये संसार
कलियुग में तुम करोगी अपनो भक्तों का उभ्धा
अगर ब्रह्मचारिनी मा कोई सिनवाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
करो नो दुर्गा का ध्यार
हो जाएगा तल्यार
हम जयोगते हैं
लिखा कथा सुखदेवने जो तुम्हें सुनाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
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