अपनी आज दोदिया हो गया निलावानी
इक नान वद हुने दो हुईया मामावी
बन गया जीजात मैं साडू किसे वीरदा
वेखले नी कैसा है हो रंग तकदीर दा
कुदरत ने जिवें किता हुंदा जापनी
मेरे बाप जिहा मैंनू लगे तेरा बाप भी
कुल काइनात ऐसे जोड़दी है साकनी
अईडि सोखे बने देना रिषते पाकनी
अपनी जदों दिया हो गया निलावानी एक नारों वद हुण दो हुईया मामावी
दुख सुख तेरे हुण दुख सुख मेरेने पुलने हिलाते मैनू गम तेरे चेरेने
सोरा कर आख ना तू आख दूज़ा करनी खोल दिता रबने होर एक दरनी
हासे आच रखूं तेनू मेरा एकरार नी सागर तों गहरा हीरे सागर दा प्यार नी
अपनी जदों दिया हो गया निलावानी एक नारों वद हुण दो हुईया मामावी