हाँ आये भीया
एक गीत आपलों के बीच में प्रस्तूत बाँ
हम गायक राजेश यादो चुनार मिर्जापूर
अधरनी परकाश भी आगे देख रेक में ये गीत आपलों
के बीच में जाद बाँ
दिनेश
एक गीत में भाव बाब देखा
है आजकाल मेहरारुन के जितने सुख सुभिदादा
उतने वो
कपार पे चल जाते हैं च्हाती पर बैट के दाल दरे लगते हैं एक
मरत बिचारा रोजी रोटी बदे बाहर जाये के तयारी केलेश लेकिन
मेहरारु आपन तुरिया चरितर देखावेश रू केले बाप का कहलेश
अगर तु बहरे जात हुआ तो सुना हर यागे जाओ
खाना यापन बस बनाईब देहियां हमना पिया जराईब यालगाईब
रजाऊँ यालगाईब रजाऊँ नातबह्या के बोला के नई हर जाईब रजाऊँ
नातबह्या के बोला के नई हर जाईब रजाऊँ
इजवन पूरे तोहरे खानदान में
इजवन तुहार भाई बा
अकेला दोस्च जाने का खाना खात बा
हमरे बस के ना हो कि हम दूनो टाइम
एक बटुआ भात
अद्दुदू सो रोटी हम बनाई
कहले बा मेरारू
करे पहलवानी देवरा रोटी खाला बीश थे
कुकुर के खीयावेले जेखनीया मारे टीस के
बटुआ भर के दाल बनाई बयांत में हम ही ना ही पाई बया लगाई बुराज़यावा
आ लगाई बुराज़यावा नाता भाई आके बोला के नई हर जाई बुराज़यावा
नाता भाई आके बोला के नई हर जाई बुराज़यावा
माई तो हर गारी देहली रोज है
कहली टंगरीया कोहरो कोरब कहीओ मार के
कहली टंगरीया कोहरो कोरब के
अब ना जान के माहुर खाई बया पन जिनगी ना गावाई बया लगाई बुराज़यावा
ओया लगाई बुराज़यावा नाता भाई आके बोला के नई हर जाई बुराज़यावा
नाता भाई आके बोला के नई हर जाई बुराज़यावा
अपने ते दुछार दिन रह के जात हुआ बाहर
हाँ
सारा दूख तकलीप यहां रह के हमही के जहले के बाँ
हाँ
बाहर और के जहली
चार दिन में चहल जाई बाँ बहरा बलाम जी
बहरा बलाम जी हाँ बहरा बलाम जी
चार में ना साहब या केले ना हम जी
खवाराज़ेस के बताईब प्रीतम जी के पुल समझाईब या लगाईब रजव
नाता भया के बोला के ना हर जाईब रजव