के आज भी तू याद करती हैं
कृया मेरे बारे में
तु मुझे को बता
कैसी है तू
कैसे घरवाले तेरे
कैसा है तेरा जहाँ
कैसे दिवाने तेरे
कैसी है तू
कैसे घरवाले तेरे
कैसा है तेरा जहाँ
कैसे दिवाने तेरे
फर काफ़ी मैंने गंदिये
सितम दिये ना करी कभी कोशिशें तबी तो हैं बुझे दिये
तुने ही फर्जदा किया जो मुझे को कुछ सिखा दिया तु ढूंडे मुझे को अब नहीं
मैं ढूंडू तुझको हर जगापर मैं आना चाहूँ आपस क्या तू आएगी
क्या तू मेरे दिल से दिल लगाएगी या आशिकी में फिरसे
डूब जाएगी तु मुझे को बता अब बिन मेरे कैसी रही तू
मुझे ना पता बस इतना ही जानना चाहूँ मैं तु मुझे को बता
कैसे दिवानें तेरे?
कैसी है तू?
कैसे घरवालें तेरे?
कैसा है तेरा जहाँ?
कैसे दिवानें तेरे?