एक अंदे गुफा में
मैं कब से जी रहा
एक अंदे गुफा में
मैं कब से जी रहा
फिर दिल के कहकशा में
एक तारा है जला
ये अनजानी सदा है
मुझे ले जाने कहा
मिर दिल की बैरोखी ने
कब से जी रहा
तु दिल को है क्यूं तुरे चाहिए
तु ही समाई है रूह में तेरी सदा
जान हूं मैं रहना ममता
देना खामोशी ना मैं है जो घंदे रहा
आन्कों से
क्यूं जेहरा हो दिखने लगा
अन्जाने
अगस्नों मैं क्यूं चलने लगा
अब कैसे मैं बता हूँ
यस दिल की अतिजाव
नहों लफसों में बयाजा
कुछ ऐसी है जबाद
जाने क्यूं ये बिल्बला है तेरा
चाहे ऐसास सर्द मेरा
कोई ना हो हाँ जो फस मेरे
सारा संसार घर हो तेरा
तो दिल कोई क्यूं तेरे चाही
तू ही समाई है रूह में तेरी सता
चाहे मैं रहना बगता
बेवा खामोशी में है जो घंदे रहा
आँखो से
क्यूं जहरा वो दिखने लगा और
अंचान में
यस दूपे क्यूं चलना लगा
तो दिल कोई क्यूं तेरे चाही
तू ही समाई है रूह में तेरी सता
चाहे मैं रहना बगता
बेवा खामोशी में है जो घंदे रहा
आँखो से
क्यूं जहरा वो दिखने लगा और
अंचान में
यस दूपे क्यूं चलना लगा और
क्यूं जहरा वो दिखने लगा और
यस दूपे क्यूं चलना लगा और