एसून्तरू
काजी
अरे हल चला खरीहानी में कटानी काटे
हम ना जाएवा
काही से बोलतरू
बड़ी रहूबा देह की गजन करदेता में
अरे ना होई चला
एहा
भरमुहे लगावेला, निहु रहे के तावेला
खटनी में खटनी हो,
खाली बोधा सधावेला,
भरमुहे लगावेला,
निहु रहे के तावेला
पहिला बेरा राजा इतना दमरी होता,
मन को हाड अउरी होता
बदा गधा छोड़ा तापसे नावा हो,
देही आपून वदी हो
गेहु के तूड हमरा कडे लागी, दुख धार दपारे लागी,
नाया बाईंजान लोहे लोहे डाला,
पाकी रही तम्परमुद लगाई है पागाः,
बरा मुहे लगाबेला, निहु रही ये के दावेला,