एक ब्राह्मण के साथ बालक थे, एक बालिका थी, बालिका सबसे छोटी थी
सभी भाई छोटी होने की बज़े से, ध्यान से सुनिये सभी
देदो अपनी पुजारन को वरदान मा, हुम्मैय जब तक जियूं मैं
गाऊं की न गाऊंगा, गाऊं उसके पहले कथा सुनिये तब गाऊंगा
साथ भाईओं की लाडली बेहन है नाम है मीरावती ध्यान से सुनो
तो मीरावती भाईयों की लाडली हैं वो प्यार करते हैं भाई
बड़ी होके मिरावती की शादी हो गई
पहली बार शादी के बाद मायके मिरावती आई है
कर्वा चौत आया है
कर्वा चौत मायके में ही ब्रत किया है
अपने भावियों के साथ मिरावती ने
कर्वा चौत का ब्रत है
सुबह शेड
अच्छा नियम थोड़ा कठीन होता है करवाचोथ का, दिन भर पानी नहीं पीना होता है, चलो ठंडी के टाइम में तो फिर भी ठीक है, गर्मी में तो बड़ी प्यास लगती होगी न, मेरे साथ तो ऐसा कभी आया नहीं, हमने तो करवाचोथ का व्रित किया नहीं,
कितनी प्यास लगती है पर लगती हो भी शायद,
तो मीराबती दिन भर जल नहीं पी,
साथ भाई बड़े प्यार करते हैं, जब मीराबती छोटी बेहन पानी नहीं पी, तो भाई लोगों को भी बुरा लगा, दिन भर भाईयों ने भी पानी नहीं पिया,
चंद्रमा चंद्रमा थोड़ा लेट निकल रहा है आज भाईयों को लगा बहन भूखी है बिचारी प्यास से तड़ पड़ा और प्यार के मारे प्रेम के मारे भाईयों ने आग जला दिया और इनकी बहन मिरावती को कहा बहन देखो चंद्रोदय हो गया दर्शन कर लो
बहन मिरावती ने दर्शन करके बृत को तोड़ दिया याद रखिए हमने अपनी आंखों से देखा है हमारे अश्रम के आसपास भरंदावन में बहुत से लोग रहते हैं जैसे ही 6 बजेगा गई धूली हुई सोई बच्चों को छट में भेजेगी जग छट में खेलना जैसे
बच्चों ने तस्पीस मिनट रुकिए ना 8 बजे के आसपास सब लोग पूजन करेंगे 8 बजे के आसपास चंद्रोदय हो जाएगा बार-बार बच्चों को छट में मत भेजना बालकनी से झाकना नहीं निकला नहीं अभी तक चंद्रमा अभी तक निकला नहीं दिन भर र
जब निकलेगा फटा-फटा पूजा करके फटा-फटा पानी पीएंगे अब पति यदि ऑफिस नहीं आए तो 150 गाली देंगे अभी तक आए
नहीं चंद्रमा निकल गया हां पेट में चूहा बूद रहा है पोट्ट यवरहा इंतजार करिए इंतजार करिए चंद्रमा आप
को निकलने दीजिए मिरावती मिरावती पूजन करती है और आकर के अन कम करती हैं जल पीती है रोटी का पहला
तुकडा मोह में डाला ला तब पति की तबयत खराब हुई दूसरा टुकडा मोह में डाला बहुत ज्यादा खराब हुई तिश्व टुकडा
मोह में डाला पति का प्राणाम तो हुआ चौथा टुकडा डालें उसके पहले खबर आ गई रोने लगी मेरा बतीं-वित
क्योंकि साथके साथ मैं पास नहीं देवी मैं तू बेटी मैं तुमको पहले कह रही थी तुम्हारे भाईओं
ने तुम्हारे साथ मजाक किया है देखो भैया देखो भैया हम लोगों में से कई लोग प्रेम के मारे कुछ
लोगों की पूजा पाठ में भंग डाल डाल देते हैं यह पूजा मत करो छोड़ो आज छोड़ो कल कर ले milk फ्रीम के
ंठ करो आज आज आज आज टीवी देखते का पूजा करना कभी मत करना मजबूत बड़ा दौश है बहुत बड़ा दौश है पहुत
परादोष कभी गलती से भी मत करना मिराबती के भाइयों ने किया मिराबती रोती अविलकती चिघाड मारती
ससुराल पहुंची सामने देखा पति को धड़ाम से ऊपर गिरकर रोने लगी हे प्रभु आपने मेरे साथ ऐसे कैसे
गिया अभी ठीक थे मेरे हाथ की महंदी भी तो नहीं छूटी-छूटी कैसे रहूंगे किसके सहारे रहूंगी घर के
लोगों ने परंपरा जो होती है परंपरा के लिए अनतिम यात्रा की तैयारी होने लगी मिराबती ने विरोध कर दिया
लेकर नहीं जाएगा, मैं लेकर जाओंगी, अपने पती को गोद में उठा करके, मीराबती वन में चली गई, छोड़ दो, मैं ठीक हूँ, मैं अपने पती के साथ रहूंगी, लेकर के चली गई, और वहाँ रोती है, हे प्रभू, गलती से गलती होगी, इसमें मेरा अपराज
के मारे गलती हो जाती है, तो भाईयों को भी माफ कर दो ना, उनसे गलती हो गई, भगवान
को हुआ है पूजन किया है क्या बोलते उसको अर्ग चंद्रमा को अर्ग दिया है उधर अर्ग दे रही थी इधर
कुटिया के भीतर से आवाजाई मीरावती मुझे बड़ी प्यास लगी है मीरावती दोड़कर आई तो एक साल से मरे पति
को जीवित पाया खुशी का ठिकाना नहीं रहा करवाचौत का जो माताएं वृत करती हैं उनका सिंदूर हमेशा हमेशा के
लिए अमर हो जाता है इसलिए कोशिश करिए यह सब कुछ ठीक है कई बार आपके करवाचौत की दिन ही आपके घर में कुछ
गलत घटना हो जाती है तो उन लोगों को छोड़ देना चाहिए ऐसा विधान है लेकिन यदि आप कर सकते हैं तो जरूर करिए
और जिनके हां प्रक्त नहीं कर सकते किसी बज़े से कोई घटना दुर्घटना की बज़े से तो ब्रत मत करिए पूज़न मत करिए पर कम
हम आज के दिन पति को जाकर के थोड़ा सम्मान जरूर करिए पानी-वानी पिलाइए थोड़ा बैठा करके एक बार कहो जय सीतारा