एही जैत के महिना में
अहा!
एगो लईकी टिकोरहा लेके घुमले फिरती
अच्छा!
अत ले लैके वा लोड़हा लेके घुमले फिरता
आई दादा हो दाओ
सोचा तकी चटनी पिसाई तो बड़ा मजाई
ओ मै ग़ाओ
अब भाईती संहती अब भाईता जा
हाही रे दादा लाग गईल बढ़ा हूमे
अलाईकी याले देखी ने का कहता
का कहता?
सूले!
जय ही आभै ताइबू
लोड़हा से तत्ता तिकोरहा के चटनी कुछ आईबे करी
ए बरुंजी,
आर बीन कहा मारे हो?
या भी कास्मी आरी गोपाले कोई ज़राहा बा?
आई बबू अभीरे नरते हुआ आई!
हम तो चरभैनी माचान करे खातीर हैने वान
सुनेल,
कामना भेरामे बारे बाबू?
या दिपो,
आरे आबा हो?
धान हाराउसांजी,
कारे आभी फुलवाते हुं काम चाने ने खोसकाता?
बारो सोय या टिकोरहे के चकर में
चानी पीसे खाछा,
अब मन बारामा
जेकोर कीकोर राजी,
जेकोर कीकोर राजी
चाहत बोड़ हल बातोर बेसी, बाडे ललचत परदेसी
कशित कोले बाटे सोर, मने भ्याल लोअ सर फ़सार
जहर्मन गाचे मे ओटकले, भोले एके जोड़ा पां,
काछे तोर टीकोर भाइशणा
তোরে টিকো ধাপান্ন৾