जोडा नारीया राबा अपफुला फुळ हरिया
जूडा नारीया राबा अफुला फुळ हरिया
कलना ही राहे खरोज।
गवुराव सजारे के चलनी रोरी घाटिया
मारी दिहने सुगन आपन चोज।
आहे छाथे माई कैसे रखते बहयाईं,
दूरबाव जर्य कनसे दोसर मंगाईं।
लागिया चहरंग जद सुगना के मरबों,
पुज़ऊं में लागे संकोज।
दिपीका विसनो के माँख कंगे हाँ गलतिया,
पैसन न रहे हामर सुझ।
जोडा नारीया रावा अपफला पफला हरिया,
लागल नाही राहे खरोज।
दोगुराव सजाये के चलनी रोरे घाटिया,
मारी दिहाले सुगन आपन चोज।