वो ही लेट बड़ा
जुठेरी सी आलू काई,
हम पेखी सी आलू काई
देखा जान आयल बानी, तोहरा लगों पाले के
छड़ी के तू घर में के खणियां, जालो न चनियां देखे
सब उज़टा नहीं
बोले ले बृत तू हो जान गोरा,
खोड़ के बीगो म्यीनो,
लाज़े सोरा,
जनिहें सॉसूर जीत,
तो टांग,
तोहर दुरी है चड़ी है नदांके,
सचो एखोगारा।।। Gujrila...
अन हमरा पो बस तोहरे होकुबा
खिरीया खाके कोही जूते हो भोये सोकुबा
खूस कात गलीया पो अपना एको कीज़ देके
हाँ तो का करी हाँ
आये संकाल
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