जग अभिराम वो श्रीराम है रघुकल सूर्य वो श्रीराम है
जग अभिराम वो श्रीराम है वचन पिता के सर पेले प्रिय
मिजसुख भूल के सीता संग जो बनवासी बने धर्मावतार जो
जग अभिराम वो श्रीराम है
कांधे पे धनो हो रे कर्मेशर ने कांधे पे धनो हो रे
कांधे पे धनो हो रे कर्मेशर ने किस विधि राभण फुलत танतारा
सुरकन रह तुही राती विर जो जग अभिराम वो श्रीराम है
कांधे पे धनो हो रे धर्मावतारा
कांधे पे धनो हो रे कांधे पे धनो हो रे
नीति में धर्म में नेमी धर्में नर और सुर सब युग युगात हो यही कहेंगे
युग युग पुरुष वो जग अभिराम वो स्रीधाम है
सुर्य मानी सा उज्जल है जो लगुवर लगुवर परुना सागर
सुर्य मानी सा उज्जल है जो लगुवर लगुवर
करुणा सागर जन जन भजता पुर्शो समको
जब अभिराम वो श्रीराम है
जब अभिराम वो श्रीराम है
जै जै राम जै रघुराम
जै जै राम जै रघुराम