शुक आजाब तो आजाब में जीवू
शुक आजाब तो आजाब में जीवू
दिख दे उसके प्यार को तू नाम पर में दे
दिख दे चाय दर्द सारे नाम फिर में
कैसी ये
इश्क की मरजीया
कैसी खुदगर्जीया
हो
गर्म गनीज दिल पे है मेरे खुदा
जो दर्द उनसे खोख नर आता
तास मेरी कह रही है तास यही सदा
अश्क के भर्जीयां कैसे खुदकासीयां
अगर लकीरों में किसमत का ये लिखा हुआ मिट चाएगा
तु खाब में आएं जिस राप उस राप पे दिल कुरबा
खाश नहीं कोई जश्ण गव पे तेरे दिल कुरबा
खाश नहीं