दबाई,
दबाई,
दबाई हाँ
इश्क हव मारीता,
दरदी दबाई हाँ
दिर्जे भी कहीले
बाई सब के मीलाल जुदाई हाँ
इश्क हव मारीता,
दरदी दबाई हाँ
मुलखाते में,
बाते बाते में,
के हो दिल काड़ेना एक राते में
तारा इंगीन के,
दरद के सिन के,
हम ता देखा तबानी खुद हिं किन के,
अई संगोखार होई जे का
भैलना भुपाई हाँ,
इश्क हव मारीता,
दरदी दबाई हाँ,
आसारा देखते दिन काटेला,
रोग अतना बढल नहीं भातेला,
पर दुख बेशीबा,
मन सरगं रोवत हर मेशीबा,
सोन पर दून के ढेर भैल जगह साई हाँ,
इश्क हव मारीता,
दरदी दबाई हाँ,