कैसे मेरी बातों में आजकर
तू नहीं
जिस मेरे हालात में अभी
ना सही
तेरे पल का जो असर
काश तुझे होते खबर
के ना मानू मैं अब तेरा
तू नहीं
पर ये गुज है साथ
क्यों
इन्तजार है
क्यों
तेरे ख़व है
हर पल धूरा बे साब खुनवार है
क्यों
जाने क्यों
सुनने लगा हूँ अब तुम्हें पर कहीं
जान गया हूँ तेरे दिल इननी
तेरी सलाहे अब सुनो
नादानी
पर अस पढ़ो
भर धड़कन में सबर तिरा
तु नहां है पर ये गुज है साथ
क्यों
इंतजार है क्यों तेरे ख़व है हर पल धूरा बे साब खुनवार है
क्यों
जाने क्यों