ज़एज़ स्री राम
ज़ेज़ स्री राम
तन की जाने, मन की जाने, जाने चित की चोरी
स्री राम से क्या छिपाए जिनके हाथ में है सब की डोली
आज हिंद के कोने कोने में
हिंद का भगवाले रे घर हर में गुझे, जै, जै
स्री राम का जणड़ा फै, रे
आज हिंद के कोने कोने में
हिंद का भगवाले रे घर हर में गुझे, जै, जै
स्री राम का जणड़ा फै, रे
राम का जग ये हो गया, तू भी राम का हो ले
मेरा तन डोले, मेरा मन डोले, जै, जै
स्री राम बोले
मेरा तन डोले, मेरा मन डोले, जै, जै
स्री राम बोले
मेरा तन डोले, मेरा मन डोले
जै, जै स्ations राम बोले
हो मेरे आ गए रखुराई, इंदवासियों को बधाई
हो मेरे आ गए रखुराई, इंदवासियों को बधाई
धन्य हो गई अवध की नगरी, दीपों से जगमगाई
भगवाः पर राहे, फर,फर गगन में होले, होलے
मेरा तन डोले, मिरा मन डोले
जै, जै स्री राम बोले
मेरा तन डोले, मिरा मन डोले
जै, जै स्री राम बोले
जै, जै स्री राम बोले
जै, जै स्री राम बोले
मैं भापत हूं स्री राम का, स्री राम मेरे भगवान है
धर्म सनातन है, अपना भगवा अपनी बहचान है
राम की गाथां गाए, बिर्जू मन मिस्री गोले
मेरा तन डोले, मिरा मन डोले
जै, जै स्री राम बोले
मेरा तन डोले, मिरा मन डोले
जै, जै स्री राम बोले