जिन चिरागों से रोषन दिवाली हुई,
उन चिरागों की लौव जिल मिलाती रहे।
एक दिन दर्द का नाम तक ना रहे,
और हर दिन दिवाली आती रहे।
हो घणा कारवां,
फिर भी कुछ गम नहीं,
एक नन्ही सी लौव गुन-गुनाती रहे।
जो खुदी को जला रोषनी कर रहे हैं,
उन चिरागों में श्रधा की बाती रहे।
नाही मध्धम पड़े आस्था का दिया,
रोषनी की दुआ रंग लाती रहे।
आप सभी को दिपावली की हार्दिक शुब्खामनाई।
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