Nhạc sĩ: Kanha Singh
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जैहनुमान ज्ञान गुन सागर
जैकपीशति हु लोक उजागर
रामदोतर्य अंधूलिक वन धामा
अंजनि पूत्र तवण तुतना
महाबीर विक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
खंचन भरन भीराज तुबेदा धानन कूट जधून के जगेदा
हाथ बज्र अरूधो जाव भीराज शांधे ओजजधे ओसाज
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज़ा प्रताप्य महाजग बद्धन
विध्यावान भुनी अतिजातुर रामकाज करिवे कोवातुर
प्रभुचदेतर रुनभरकोरत्या रावनकन नितावणभज्ये
सोक्समरो मनारी
सियंही दिखावा
विकडरो नदरी लंक्य जड़ावा
वीमरोबधरी अशुर संगारे राम चार चेदाज सवार
लायस जीवन लखन जीयाए
देली रगोबील हरस के उड़े लाए रगुपति कीनी बहुत बढ़ाए तुमम अपनी ये
परत थेशमवाए
शहस बदन तुमरो जसगावे असकै श्रीपति कंड्र लगावे
सनकारिक ब्रामादी मुनीता तारद तारद सहेत यहे साव
जमकुबेर दिगपार जहाते कभी को बिद कही सके कहाते
तुम उपकार तुभी वही थीना ताममिलाय राज बजदेना
तुमरो मंत्र राम
तुमरो मंत्र तुमरो मंत्र
तुमरो मंत्र विभीशन माना
लगे पर भयव तब जग जाना
जुग सहस्र राम जुग सहस्र
जो जन परभानू तीले उता हिमलोर भलरानू
रभो मोध्रिकामेली मुखमाही जलदे लाँगे अच्छे रखे नाए
दुरगम काज जगत के जेते सुगम यनूग्रह तुमरे ते जेते
अधमर देद जाद के माता
रामर सायन तुमरे पासा
खदार हो रखो पति के दाशा
बुमरे मजन राम को गावे
जनम जनम के दुख भिचरावे
अंतकाल रखो बरबुरलाई
जाजनम भरिभाष्ट कहाई
आउर देवता चीतन धरई
अनुमत सेइता वत्त करई
संकट कटे मिठे सब पीरा
जो जुमेरे रम जो जुमेरे अनुमत बलपीरा
जय जय जय
अनुमान भुताई जिनाराव गुरुदेव खिलाई
जो सत्बार पाठ कर कोई चुटे बन्दे महादुप होई
पड़े हनुमान
तालीशा होई शिर्दे दाके गवरेदा
खुल सीदा
शिस्दार चेहरा
कीजे नात हरदे महादेरा
वन तने संकत हरन
मंगल मूरतिरू
राम लखन सीता सहित
रदे बसो सूरभू
पूर्य हनुमान जिन महराज कीजे
सियावर राम चंद्र कीजे