तब उरि दहीया भी जावता पसेना गोरी
काओ टार कोईन करे
ना करे
चुक
खीरा जन जीरा के सेवन बबेशी,
फेल भोई पंखा,
फेल भोई लेशी
आरे पैसा नई खेपाले अभी बाते परसानी,
इपीलाना माता काके ताटा कापा पानी,
इह हमार अन्धन भाई स्वानी
निर्मपणे संभलें बोक चोसी,
कामना ही पोड़े सब भोन कभोसी
अगर आपको प्रश्चान बग़ें जाने के लिए,
तो तो प्रश्चान भोई पंखा नहीं होगा
ही माचल शलब्बू
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