ओलाओ
नाहे गहरन में मुसापजन कईयार
फर्माशा गोट बुठी का गुलाम फरीद लुण्ड,
गुलाम सेन लुण्ड,
राशित अली लुण्ड, आईं सद्धाम लुण्ड,
पराबर परसी चापेचे,
गहरन में किथे दमवाप
जनमें गतारीया,
रत रत के लगलों
आहेदा वक्त पचारीया,
रत रत के लगलों आहेदा वक्त पचारीया,
पाजन जी सनास नाहे,
रुंगो
पेसन जी प्यास वाहे,
वयाकलब वाहेन मत जी भावो तो बाजारीया,
गहरन में किथे दमवाप जनमें गतारीया,
रत रत के लगलों आहेदा वक्त पचारीया,
रत रत के लगलों
आहेदा वक्त पचारीया,
एक घर जा आहेन बाती कयों, एक बेल बतन काती,
ओर
गने ते अदाथ में बंदूक कुहारीया,
रत रत के लगलों आहेदा वक्त पचारीया,
ओर गने ते
अदाथ में बंदूक कुहारीया,
गहरं में किथे दमवाप जनमें गतारीया,
रत रत के लगलों
आहेदा वक्त पचारीया,
दोस्तों, इन कलाम जो शेहरामुजो भा,
वर्डेसि पीरल लुण्ड,
आखिर मिचरामिर्सी चापेटे,
अदार्याज जानी,
रयाज मांगनार,
एडो वक्त वर्जो आहे,
पीरल केर केंजो नाए,
लुण्ड आसमाए,
जिठी मूई
तुन्या सारीया,
गैरन में किठे दमवाप जनमें गतारीया,
रत रत के लगल वाहे दा वक्त पचारीया,
रत रत के लगल वाहे दा वक्त पचारीया,
अल्लाव।
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