परका हो मुगना निबामा को दुलिशा
पर्देश मैं सुगिना निबाली भैसा भुगे
कति रांगो भगई चाले आका सत्रुल्लाली
कति संजु दाईको दुक मन पनिर्मुल्लाली
परिक्खा हो मुगना निबामा को दुलिशा पर्देश मैं सुगिना निबाली भैसा भुगे
कैसे,
पलली बहचा गिपरी गेड़ी
गिपरी गेड़ी
खड़ा दंबा चलाउना की मकी बैको बाई
सदाई बरी पर्देशामा छोड़ा पद्धो चाई
सदाई बरी पर्देशामा छोड़ा पद्धो चाई
पर्था ओ मुगना निबामा को दुखस्या
पर्देश मैं सुगिना निबाली भैसाँगे करिके
तलका न्यासुना कोई होती कथा ही तेरी
येशा लगारे आया दाजु बता हे देरा
पर्था ओ मुगना निबामा को दुखस्या पर्देश
मैं सुगिना निबाली भैसा भैकतें जी करीके
पर्खो मुग्गानी बामा को दुविसाम्दरः
पर्खो मुग्गानी बामा को दुविसाम्दरः