ज़िम्बस्ती अप, अप
जाज रानी
खाहु मंगमे से मूर भोल भारी हो
काहुर दिलवा से कोहते नकारी हो
Kaat?
Saajo
जो पत्तिया बुलेलू जब जान करे जावा जुडा ला हो
अरे पगला इहेनु प्यार नूँ
सही कहा तारो
जब जुडा ला हो
मजबूरी में होता साधी
तू ही राबा है दिलने
ओहो
हाँ हो
तू ही तम्हीली जईए बलानु आहो
का हो
बिची ही ताहर कैसे मज़नु आहो
ऐसे मज़नु
पिया हो सके जई बुद्धु सश्दा
आइबना फेर
की ज़िन्द अग था ई मिलकुलों खेसरी जया हो الك APP
अनुप्रल खेसरी गेजुद हो
हाँ
साच हो
एगो बात सुनाँ
काहो
का?
अरे प्यार प्यार हुला
का?
हो जा
खिले पोलिया बुलेलू चापो चाट
ओदे जाबा जुराना
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