ई मानोर सरी जब परमात्मा के असीम कृपा होना ता मिलेला ता
इह जिवन के परभू नाम के शुमिरन करके जिवन के सार्थक बनाये .
इतन फिर ना मिली ये साधो
परता मानुस देही आपवला
जे तो हराते भे जल जग में ओही के तू भी सरवला
ए साधो ओही के तू भी सरवला
अईसन कर बात बला फिर
कैसे काम चली ये साधो इतन फिर ना मिली
बनाला ए साधो सुन्दर चीत बनाला
सास्त्र पुराल के
गंगा में डुबुकी मार नहाला
तब तो हरे हीरी दे के ताल हरी
प्रीत के कमल खिली ए
साधो इतन फिर ना मिली
चेताय भही समय भहुत बा नात तु फीर पज़टाई बा
ए साध हो नात तु फीर पज़टाई बा
हो जाई
जनमय कारत जब ना तु हरी गुन गईबा
ए साध हो जब ना तु हरी गुन गईबा
भेश पनावल याब छड़ी दा तु
भेश पनावल याब छड़ी दा तु
दा दुख से,
मि भत्तर के
ए साधो इतन फीर ना मिली
ए साधो इतन फीर ना मिली
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