दुर्गा माता की कथा है अतियगम अपार
जिसकी महमा गा रहा है सारा संसार
सृष्टी के आदकाल में जब मदु कै तब असुरमान हुए
जिनके आतंक मुझे
वाद से तब देवता सभी हैरान हुए
भगवान विश्टु का वर्तान ने
ना चल में मरे ना धन में मरे
देवता सभी चाहते थे दुष्ट
जैसे
जैसे भी मरे इक पल में मरे
तब सभी देवताओं ने मिल साद शक्ति का ध्यान किया
शुरगा माता ने प्रगत वोकर उन सब का खा कल्यान किया
युपती से हरीमान
ने तभी चंगा पे रख उने मार किया हरिशित होकर दुर्गा माका देवों ने जै जै कार किया
देवों ने जै जै कार किया
मरे महान पद्रवकारी दुखी देवता भय सुखारी
भयो तबी परिपूरन काम मधू कै तब विद्रावी नाम
जब महिषासुर ने किया देवों से संग्राम
जब महिषासुर ने किया देवों से संग्राम
मरे महान पद्रवकारी दुखी देवता भय सुखारी
भागे सब ही देवता, तज तज निज निज धाम।
जीने अधिकार सभी उनके, उस महा प्रबल बलकारी ने,
सुरलोक अधिकारी किये, धीनुस पापी अत्याचारी,
ओ दुखी देवताओं ने, जबी दुर्गा माता को ध्याया गए,
ओ प्रगट तभी दुर्गा माने, निज चमत्वार दिख लाया गए,
देवों की सहायक बन तुरंत, उस तुष्ट पे प्रबल प्रहार किया,
निज शक्ती से शक्ती माने, मही शासुर का संघार किया,
हो गए देव कल सुक्की सभी, कर प्राप्त फूला धन धाम अपना,
तब से दुर्गा माता ने धरा, मही शासुर मर दिनी नाम अपना,
मही शासुर मर दिनी नाम अपना,
चुम्ब निशुम्ब भै बलधारी अती बलवान निशाचर भारी
दुखी तु होए तब देव पुकारे हे देवी दुख हरो हमारे
प्रगटी तब देवी अती सुन्दर रूप सवार
देख चंदने शुम्ब से कहा सहित विस्तार
बोला मैंने निरजन बन में देखी कि सुन्दर ना ली गए
ऐसी सुन्दरता तो मैंने अब तक नहीं कहीं निहारी है
अब तक नहीं कहीं निहारी है
सुन शुम्ब ने बेजा दूत तरह
भी बोले संदेश वहाँ आया गए
शुम्ब राज तुम्हें वरना चाहे
ये सुन माने परमाया गए
ये सुन माने परमाया गए
कहना यदि वरना चाहे मुझे
तो पहले वो इतकाम करे
बाद में व्याग की कुछ बात होगी
पहले मुझसे संग्राम करे
पहले मुझसे संग्राम करे
मेरा प्रन रह व्या करने से
मेरा प्रन रह व्या करने से
पहले पन को अजमाऊँगी
जो रन में जीतेगा मुझको
जो रन में जीतेगा मुझको
में उसकी पूरानिया प्रस्तु नहीं रहने चाहे
मैं उससे भी आने जाऊंगी
मैं उससे भी आने जाऊंगी
ये सब दूत कयो जब जाई
शुम्ब ने तब सेना भिजवाई
सेना पती बोलो तहां आई
चल हूँ तुरंत ना तोले हूँ ठाई
मा बोली है कोन जो मुझे उठा ले जाए
हाथ तोड़ डालूं अभी मुझे जो हाथ लगा
बोरा दुर्गा माता की जै
ये सुन सेना पती बड़ा जबिमाने तब प्रबल प्रहार किया
एक बार सेली उस अभिमानी सेना पती का संघार किया
सेली पूने वहां से भागते हैं
शुंग को सब कुछ बतलाया गए
तब शुंग ने धूम्र विलोचन को सेना संघ वहां पठाया गए
आरन में धूम्र विलोचन ने धूआ ही धूआ कर डाला गए
दुर्गा ने तभी निच शक्ती से कर दिया तुरंत उजाला गए
तब ले कटार कर प्रबलवार उस दुष्ट का सीस उतार दिया
लिश्चर दल दल नी दुर्गा ने देवों का कष्ट निवार दिया
कह धन्य धन्य सकल सुर हरशे नभते सुमन मनो हर वरशे
धर्यो सुरन तब लखी परिणामा धूम्र विलोचन मर दिनिनामा
धूम्र विलोचन का हुआ जब ही काम तमाम
चंड मुंड आये तभी करने को संग्राम
बोलो दुर्गा माता की जै
थे चंड मुंड निश्चर उदंद
अनकिलत से ना संग्राम लाये ते
दुर्गा माता ने भी खुल कर
उनको निश्चर उदंद
लिज्जात दिखाये ते
आये तोते ललिगारते हुए
खीच कर तुम्हे ले जाएगे
मामार रतीत हुआ अब तो
हम भी बचने नहीं पाएगे
माष्ट बुजी के हाथों ते
कहते बच पाते वो मतवाले
अल चंड मुंड सेना जमेद
माले तब सभी मार डाले
माले तब सभी मार डाले
निष्चर तर पड़ा धरा तल में
चल दर पड़ा धराकल में हामचा वहां गोहराम पड़ा
तब से ही दुर्गा माता का चंडमुंद विनाश निनाम पड़ा
कटक सहित सब गए संहारे रहे नत नहीं को रोवन हारे
जो जो निश्चर जुर जुर धाए गए सकल यम लोक पठाए
सूचित करता कौन उने
हुए यहां सब नहीं
करें ही कष्ट
शिव जी से बोली शिवा करें आप ही कष्ट
ये पूरन काम धगवना
अब तो मेरा भी संपूरन काम करे
उन गुष्टों से कहना जाकर
आकर मुझसे संगाम करे
शिव हसकर बोले तू रही
मुझको भी काम बताती हो
पहले तो महा प्रभु कहा और
अब मुझे गुलाम बनाती हो
अच्छा पनता हूं मैं दूथ तेरा
कौन सा काम ये निथका गए
करने के लिए तैयार हूं मैं
जो काम सबी के हितका गए
बन कर शिव दूथ गए तब ही
करना ये उने जब काम पड़ा
दुर्गा माता महा देवी का
दुर्गा माता महा देवी का
तब से शिव दूती नाम पड़ा
महादेव बोले जब जाई रक्त बीज धायो अकुलाई
वाको रक्त जहां गिरे गिरावे कोटिक रक्त बीज उपजावे
रक्त बीज के रक्त का देखा जबी कमाल
माले दिखलाया वहाँ चमतकार ततका
बोलो गुर्गा माता की जाय
अर्धित देवि आवि फ्रत
मिजचमकार दिखलाने लगी
धरती पर गिरारक उसका
वै सबका सब भी जाने लगी
आर्धित देवि आवि फ्रत
पर सबका सब भी जाने लगी
ओ जब रात समाप्त हुआ तब तो
निज कर ली पर पच्चताने लगा
अब करता भी तो क्या करता
सर पर था काम मन राने लगा
महा देरी मा महा शक्ती ने
उसका छल को शल हर डाला
आखेर उस रक्त बीज का भी
दुर्गा माने बद कर डाला
जै जै कर सभी देम बोले
जै रक्त बीज संघारनी मा
जै जै रिष्टर विनाशनी मा
जै जै सुर्तापनी मारेہी मा
जै जै सुर्तापनी मा
जै जै सुर्तापनी मा
जै जै सुर्तापनी मा
शुम्ब निशुम्ब तबी उठधाए अति विक्राल निशाचर राए
सिंग वाहनी की ओ प्रहारा प्रखम निशुम्ब निशाचर मारा
मारा निशुम्ब शुर्जबी हुआ शुम्ब बेहाल
मारा निशुम्ब शुर्जबी हुआ शुम्ब बेहाल
लाया कटक बटोर कर किया युद विक्राल
बोलो तुरगां बादागी
बोलो तुरगां बादागी
लेकटक असंखि शुम्भरन में आया ललकार सुनाता हुआ
पाप उठाता देव समाज सभी उस निष्चर से भैपाता हुआ
लेकुडा महादेवी वो दुष्ट महामाया से की छलमाया
उपर से नीचे घिरा धडाम अपनी कर्मी का फल पाया
दिखलाया
बहुत छलबल का ख्रम माने सब भी बेकार किया
मर गया निशुम्भ दुष्ट तब ही देवों ने जैजै कार किया
बोले सब देव सुखी होकर माहम पर किपा तुमारी है
तब सभी देवताओं
मोने मिल माकी आरती उतारी गए
माकी आरती उतारी गए
मोने मिन confirm irrigated
जैदुर्गे दुर्गम्तम्हारी
जय दुर्गे दुर्गम तमहारी जय जगतारी मंगलकारी
जय जगतारी मंगलकारी जो जनमा तेरो यश गावे
सुख संपती परम गति पावे कही कथा संशेप में अलप समय अनुसार
करे वियोगी मां कृपा कर दे वेडा पार
करे वियोगी मां कृपा कर दे वेडा पार
करे वियोगी मां कृपा कर दे वेडा पार