सज़ गई है गलिया सारी रोषनी है चारोर
गली महुले गाओ शहर में मच गया है अब ये शोर
कही जालर की चमक है कही रंगोली का रंग है
हातों में फुल जड़ी लिये हर कोई अपनों के संग है
पटाकों की लड़ी लिये हर कोई आज तैयार है
दीवाले बस त्योहार नहीं है ये इक संस्तार है
छोड़ो अब सारे दुख अपने कुशिया चा गई है जल रहे हैं दीप सारे
दीवाली आतरी है