बजाऊं गडी के मा भजन गुरू के
खिर केन आओं में तो दरिशन गुरू के
आगया से चोवी दिसम्बर पे चालो न जी मंदर
मिला लागया चुड मजरा गाम गुरू का
आजा दिखादू तन धाम गुरू का
मन मैं बसादू तेरे नाम गुरू का
पिछास ता पाथ सुणूंगी ओम के लाऊं जेकारे
लगद्यू मैं देऊ आहुती सेवा मैं लाऊं भंडारे
खारा पहला पचरंगे लाखा के मैं संगते आवे
चाल ले जब सोब यातर सड़का पे हम रो नकलावे
खिर से इंतजार वाम गुरू का
आजा दिखादू तन धाम गुरू का
मन मैं बसादू तेरे नाम गुरू का
गल में जो डालालो किट राखू सो मैं आसता उसमें
ब्रह्माननद की करू सो बक्ती दिखाया से रासता उसमें
हो हो
मौन गुलर बुरे आले पैकर रखी किरप गुरूना
राडे आले सूबं के हाथ देरा से सिर्प गुरूना
नवीन करा गुण गान गुरू का
जलो दिखा दू मनने धाम गुरू का
मन में बसादू मेरे नाम गुरू का
आजया दिखा दू तन धाम गुरू का
मन में बसादू तेरे नाम
ओम तत सत ओम गुरू जी
ओम पिता जी ओम तू ही ब्रह्मानन्द जी ब्रह्मानन्द जी जैवो तेरी