कैसे मैं बुलू के तू है मेरा
और मैं था तेरा साज़िना
कैसे गुजरें ये राते मेरी
अब तू बता मेरे साज़िना
फिरू मैं दर बदर तेरे ही क्यारी में
तनहा दिल मेरा
इंतजार में
फिरू मैं दर बदर
तेरे ही क्यारी में
तनहा दिल मेरा
इंतजार में
मैं
रुका हूँ वही
जहां था न तुझी साई कोई तनहाई साई
था न
तुझी साई कोई
तनहाई साथ है
जो घेरे हुए हैं मुझी को
मैं लापता इस जहान में कैसे ढूंडू मैं अपना वो घहण
थीना मेरा मुश्किल हुआ दिकता है तू ख़ौम में
खुआइशे अधूर इसी जो जीती कभी साथ में
फिर मैं दर बढर तेरे ही त्यारी में
तनहाँ दुल मेरा
इंतजार में
तेरे बिन
अब खाली साहूं
आइना भी अब कुछ दिखाता नहीं
रूह भी
ऐसे बेचैन है जैसे प्यासे को मिला पाने नहीं
जूठे हर वादे रहे जो किये थे कभी साथ में
मुबारक हो तुझी को तेरी महफ़िले समी
फिर मैं दर बढर तेरे ही त्यारी में
तनहाँ दुल मेरा इंतजार में
फिर मैं दर बढर
तेरे ही
त्यारी में
तनहाँ दुल मेरा
इंतजार में
कुछ कस्मे हैं
जो हम आज भी निभा रहे हूं
चाहते तुम्हें कल भी थे और आज भी चाह रहे हूं