पूल के लब आजाक है तेरे
बोल सबा अब तक तेरी है तेरा सुत्वा जिस्म है तेरा
बोल के जाँ अब तक तेरी है
बोल
बोल के लब आजाक है तेरे
देख के आहं गर की दुकावे दुंद है शोले
सुर्ख है आहं खुले लगे
पुफलो के दहाने फैला रिख जंजीर का दाव
बोल
बोल ये थोड़ा बढ़ बहुत है जिस्म सबा की माँ सिर्फ है
बोल
बोल के सच जिन्दा है अब तक
बोल जो मुझ केहना है केहले
आहं गर की दुकावे दुंद है शोले