करपूर गौरम करणा वतारम
संसार सारम भुच्गेंद्र हारम
सदा वसंतम हिर्द्यार बिन्दे
भवं भवानी सहितम नमामी
हर हर बहादे
भोली कि देखो निकली बरात
संग्भूत प्रेति किन्णर पिशाच है
रूप बनाया ऐसा जैसा हुआ नहीं कोई स्विष्टी में
मैना राणी संदेह करें जब महादेव आईद्रश्ठी में
वो भूत प्रेत संग मगन हुए ना अब तक ऐसी लगन हुई
ये देख बरात कोई ऐसा हाँखार मचा हुआ बस्ती में
बोले बाबा तो रहे नाच वहाँ पर
चारो तरफ है उड़ती राक वहाँ पर
नशे में दुत जिनका रूप भयंकर
भूत प्रेत संग पिशाच वहाँ पर मैं ना
राणी ये सोच रही कैसे देदू मैं बेटी को
मेरी तो फूल सी बेटी इनकी रूप थो सजब ऐसी हो
मेरा तो मन गबराता है जब देखे इनके राग आज
सक्यून ने नेक जो मांग लिया तो देदी आ गले का नागराज
सब रह गई बहाँ पर खड़ी खड़ी सब सहम गई सब धड़ी धड़ी
सब कुछ अचेत हो वही गिरी सासें आखे सब चड़ी चड़ी
ये रूप भयंकर देख लिया अब कैसे मैं ये काम करूँ
मेरा तो मन गबराता है ना ऐसे गण्यादान करूँ
शुरू माथे पे देखो है चंद्र ताज तंछिता पस्म गले
नागराज धरे वाग छाल और मुंड माल बोल बं बं बं बं बं
ये बात सुनी मा पारवती ने सोचा अब संकट है ऐसे ना ब्याह कराएंगी
ये मेरी माता का हट है मन में हलचल हुई माता के सोचा स्वामी
से बात करूँ ये संकट आन पड़ा है जो इसका मैं अब समधान करूँ
वो बोली महादेव सुनलो मेरी माता ने हट पकड़ लिया इस रूप न
ब्याह कराएंगी इस बात का उनोंने प्रन है किया बस उनकी एक
ही मनशा है हो मेरा वरभी रूपवन और आप से सुन्दर कौन भला
इस बात का मुझे को भी है ग्यान मेरा तो आप से प्रेम बहुत म
प्रणी भी मान गई जब वर देखा ऐसा विशेश इस दिव्यद्रश को देख देख सारा
संसार ही मगन हुआ बस इस पकार मा पारवती शिव का विवास संपन हुआ बोले बाब
करके शिंगार बैठे हैं देखो नन्दी पे आज डमरून गाड़े और शंक नाद बोल बं�
बोले की देखो निकली बरात संगाल हर सुख हर
दारिद्र हर गश्ट हर भोग हर भर हर महादेव