आईये मेरवानों ये रागनी होगी किस्सा होगा अजीश सिंग राजवाला
मौका उस समय से होगा कि जब अजीश सिंग और राजवाला तहराते रहे होते हैं
तो किस प्रकार से राजवाला रात का समय था अजीश सिंग सो कहने लगी
पिया जी ये हमारे बीच में कटारी क्यों रख दी
तो अजीश सिम राजवाला को समझाने लगे राजवाला
मेरा और तेरा रिस्ता जब तक ये कर्ज नहीं उतरेगा
तर तक भाई और बहन का रहेगा
किस प्रकार से क्या कुछ पूछती है वो राजवाला
सुनेगा बाकी हवाला इस राघनी के माध्यम से
इस राघनी को सुनेंगे आप देहाती राघनी अंडिजे के माध्यम से
इसको लेकर क्या रहे हैं आपकी लाडली कलाकार राधा चौदरी
इस राघनी को लिखा है आदरनी गुरुजी गृजपाल सिंचर औराजी ने
हेर बेद खोल के बता मने क्यों रहती खड़ी कटारी
अरे ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
बेद खोल के बता मने क्यों रहती खड़ी कटारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
ओ बेरन कंबगत करे क्यों मारी पहरदारी
कोन जनम के बेर लिकाडे रहे रात भर खाडी
शादी करके बेर लिकाडे रहे रात भर खाडी
पिया जीना इबलों देखी साडी
कोन जनम के बेर लिकाडे रहे रात भर खाडी
शादी करके बेर लिकाडे रहे रात भर खाडी
पकडी नहीं हात में नाडी
पकडी नहीं हात में नाडी
तुनसी गुप्त बिमारी ओ बेरन कमभक करे क्यूं मारी पहरेदारी
आज दिन की बनी सरपनी तुटस के छोड़ेगी
विरजपाल सिंग बाला रोई तु किसमत भोड़ेगी
आज दिन की बनी सरपनी तुटस के छोड़ेगी
विरजपाल सिंग बाला रोई तु किसमत भोड़ेगी
मोड़ेगी किस ओड जिन्दगी मैं तेरे तहारी
ओ बेरन कमभक करे क्यूं
आज दिन की बनी सरपनी तुटस के छोड़ेगी
मारी पहरेदारी ओ बेरन कम बत करे क्यूं
मारी पहरेदारी बेद खोल के पता मने क्यूं
रहती खड़ी कटारी ओ बेरन कम बत करे क्यूं
मारी पहरेदारी ओ बेरन कम बत करे क्यूं
मारी पहरेदारी
मारी पहरेदारी
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