एक राजा एक राणी की सुनी थी कहाणी कितनी एक राणी इसने तेरी खाणी वै
पारिश की धाला गया गराप बरस ना आया तरस याँख्या आले पानी पै
बेवफां बेवफां के वज़ाती बता
तेरे बदले बाजां तेरी बदली वो गलियां रोज रोज पोड़ते हो नई नई कलियां
तो ऐसे रास लचाता है तन की प्यास बुझाता है कि चेहरे कहां से लाता है मुझे कुछ समझ ना आता है
बेवफां बेवफां
के वज़ाती बता ओ बेवफां बेवफां के वज़ाती बता ओ
बेवफां
बेवफां
तो ही खुदा मेरा तुझ पे यकिन था तुझ से बिला हर लमहा चीन था
लमहा चीन था
हो यारा बड़ा फरेबी तू रब मुझे नहीं उठाता क्यूं
अब नहीं हो ना रूबरू चला जा तू
बेवफां बेवफां के वज़ाती बताओ